लखनऊ, डॉ.जितेंद्र बाजपेयी : उत्तर प्रदेश में महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आजीविका-केंद्रित तकनीकों पर एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में किया गया। इस कार्यक्रम में सरकारी मिशनों, तकनीक विकसित करने वाली संस्थाओं, महिला उद्यमियों और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य यह समझना था कि किस प्रकार व्यवहारिक और नवाचारी तकनीकी समाधान उत्तर प्रदेश में महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों को मजबूत बना सकते हैं।
यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत साइंस फॉर इक्विटी, एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट (SEED) डिवीजन, डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (DA) और विज्ञान आश्रम (VA) के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस बाज़ार के लिए तैयार तकनीकों को जमीनी स्तर के उद्यम तंत्र से जोड़ना था, जिससे तकनीकी नवाचार और सामाजिक प्रभाव के बीच की दूरी कम की जा सके।
चर्चाओं में ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, जल, स्वच्छता, निर्माण सामग्री, अपशिष्ट प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में कम लागत वाली, अनुकूल और विस्तार योग्य तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि महिलाएँ स्थानीय अवसरों को टिकाऊ उद्यमों में बदल सकें।
तकनीकें स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई
आयोजित प्रदर्शनी में प्रमुख संस्थानों और जमीनी नवप्रवर्तकों द्वारा विकसित आजीविका-केंद्रित तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इनमें सरदार पटेल नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (SPRERI) द्वारा बायोमास कुकस्टोव और सोलर फ्रिज, IIT बॉम्बे – RuTAG द्वारा सोलर हाइड्रो डिस्टिलर, RuKart द्वारा सब्ज़ी कूलर, किसान धरमबीर द्वारा मल्टी-पर्पज़ फूड प्रोसेसर सहित अन्य तकनीकें शामिल थीं। ये सभी तकनीकें स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं और मूल्य संवर्धन, लागत में कमी तथा उद्यम विस्तार के अवसर दिखाती हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत प्रदेश की लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के मिशन पर तीव्र गति से कार्य कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म-उद्यमिता और उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी वार्षिक पारिवारिक आय को ₹1 लाख से ऊपर ले जाना है।
उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति के साथ समन्वय बिठाते हुए, UPSRLM (उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) के माध्यम से इन महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण, वित्तीय साक्षरता और व्यापक बाजार लिंकेज सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर विकसित भारत के संकल्प में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
मुख्य अतिथि सुश्री दीपा रंजन ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुश्री दीपा रंजन, आईएएस, मिशन निदेशक, UPSRLM रहीं। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, महिला उद्यमियों से बातचीत की और प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित स्टोरी सर्कल में महिला उद्यमियों ने तकनीक-आधारित उद्यम स्थापित करने के अपने अनुभव साझा किए और ज़मीनी स्तर से मिले व्यावहारिक सीखों को सामने रखा।
दिन का एक प्रमुख आकर्षण “उत्तर प्रदेश में महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को तेज़ी देने हेतु आजीविका-केंद्रित तकनीकें: नवाचारों का विस्तार और चुनौतियों का समाधान” विषय पर आयोजित राउंडटेबल चर्चा रही। इस चर्चा में सरकारी अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, आजीविका क्षेत्र के कार्यकर्ता, वित्तीय संस्थान और बाज़ार से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा का उद्देश्य पायलट स्तर से बड़े स्तर तक विस्तार की प्रक्रिया को समझना और महिलाओं को केवल जीविका आधारित कार्यों से आगे बढ़ाकर अवसर आधारित, विस्तार योग्य उद्यमों की ओर ले जाना था।
UPSRLM और DST के SEED डिवीजन के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
यह कार्यक्रम UPSRLM और DST के SEED डिवीजन के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। इस समन्वय के माध्यम से ग्रामीण आजीविका संस्थानों की पहुँच को राष्ट्रीय स्तर की TAP-RISE (Technology Acceleration Platform for Rural Innovation and Social Entrepreneurship) पहल के अंतर्गत समर्थित सामाजिक रूप से उपयोगी तकनीकों से जोड़ा गया। इससे तकनीक विकसित करने वालों और ग्रामीण उद्यम संस्थानों के बीच संरचित संवाद संभव हुआ, जिससे पायलट, साझेदारी और तकनीकों को तेजी से अपनाने के अवसर बने।
दोपहर में आयोजित टेक्नोलॉजी स्पॉटलाइट सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को ऊर्जा और ईंधन, जल एवं स्वच्छता, तथा कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी उद्यम-तैयार तकनीकों की जानकारी मिली। कार्यक्रम का समापन नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ, जिसने महिला संस्थानों, तकनीक प्रदाताओं और सहयोगी संगठनों के बीच ठोस संपर्क स्थापित किए।
विज्ञान, तकनीक और ग्रामीण उद्यम प्रणालियों को एक साझा मंच पर लाकर, इस कार्यक्रम ने यह प्रदर्शित किया कि किस प्रकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार टिकाऊ आजीविकाओं और मजबूत उद्यमों में बदल सकते हैं, तथा उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए उभरते आर्थिक अवसरों को सामने ला सकते हैं।
