कोलकाता, संवाददाता : चुनाव आयोग के अधिकारियों ने सोमवार को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा-शासित उत्तर प्रदेश से 200 वाहनों में सीआरपीएफ जवानों को भरकर चुनावी राज्य बंगाल में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य बंगाल में भयमुक्त, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
मिडिया के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय बलों की सभी तैनातियां स्थापित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार निष्पक्ष तरीके से की जा रही हैं।” तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश से सैकड़ों वाहनों में सीआरपीएफ जवानों को बंगाल लाया गया। साथ ही कहा-”..यह 15-25 दिन का खेल है। इसके बाद उन्हें असली खेल समझ आएगा।”
ममता ने अक्सर चुनाव आयोग पर भाजपा के फ्रंट ऑफिस के रूप में काम करने और उसकी लाइन पर चलने का आरोप लगाया है। राज्य में एसआईआर ने तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच और भी दरारें पैदा कर दी हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर की गई टिप्पणी ने कानूनी तूल पकड़ लिया है
उधर, कोलकाता, संवाददाता के अनुसार, बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर की गई टिप्पणी ने कानूनी तूल पकड़ लिया है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री के बयानों को ‘उकसाने वाला’ करार दिया। आयोग ने अदालत को बताया कि इस तरह की बयानबाजी से राज्य का चुनावी माहौल और बिगड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पांचोली की पीठ के समक्ष आयोग के वकील ने कहा कि एक भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश से सीआरपीएफ जवान आकर आपको मारेंगे, इसलिए तैयार रहें।
आयोग ने इस भाषण की रिकार्डिंग भी साक्ष्य के तौर पर अदालत को सौंपी है। इन दलीलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहता है, तो शीर्ष अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करने पर विचार करेगी।
