Magh Mela : मौनी अमावस्या के पहले ही डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

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प्रयागराज, संवाददाता :मौनी अमावस्या स्नान पर्व को लेकर मेला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर पुख्ता इंतजाम के दावे किए हैं। 

मौनी अमावस्या स्नान पर्व को लेकर मेला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर पुख्ता इंतजाम के दावे किए हैं। मेला प्रशासन ने मौनी अमावस्या से एक दिन पहले शनिवार शाम तक करीब 1.50 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने का दावा किया है। वहीं, रविवार को 3.50 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी आपातकालीन योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

नौ मजिस्ट्रेट और कंट्रोल रूम से सीधा समन्वय

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि क्षेत्र में व्यवस्था के लिए नौ मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है, जिन्हें भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी मजिस्ट्रेट को आपसी समन्वय बनाए रखने के साथ-साथ आईसीसीसी स्थित कंट्रोल रूम से लगातार संपर्क में रहेंगे। पुलिस अधिकारियों और जवानों को कहा गया है कि वे श्रद्धालुओं से मर्यादित और संवेदनशील व्यवहार करें। शनिवार को आसपास के जिलों के डीएम और एसपी के साथ ऑनलाइन बैठक कर दिशा-निर्देश जारी गए। इसके साथ ही यातायात डायवर्जन प्लान को सख्ती से लागू करने को कहा गया है।

नए घाट, वाटर एंबुलेंस और वैकल्पिक मार्ग

मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि काली पांटून पुल के पास 600 फीट क्षेत्र में एक नया स्नान घाट विकसित किया गया है। इसके अलावा नदी में दो वाटर एंबुलेंस तैनात की गई हैं। आपात स्थिति में एंबुलेंस की आवाजाही के लिए किले के रास्ते को आरक्षित किया गया है। श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ की स्थिति में किले के दरवाजे खोलने की अनुमति भी ली गई है। भीड़ नियंत्रण को लेकर मेला क्षेत्र में प्रत्येक एक मीटर पर एक पुलिसकर्मी की तैनाती सुनिश्चित की गई है।

इस वर्ष पुण्य वर्धक योग : प्रो. ब्रजेेंद्र मिश्र

प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य प्रो. ब्रजेेंद्र मिश्र ने बताया कि अमावस्या का स्नान मुहूर्त रविवार को प्रातः 5:20 बजे से सूर्यास्त तक रहेगा। इस अवसर पर गुड़, घी, लकड़ी, तिल, कंबल और चावल का दान विशेष फलदायी होता है। इस वर्ष मकर माघ स्नान पर पुण्य वर्धक योग बन रहा है। शनि और बृहस्पति को छोड़कर अन्य सभी ग्रह मकर राशि में हैं, जिससे इस स्नान पर्व का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।

पांटून पुल की व्यवस्था
– परेड से झूंसी जाने के लिए पांटून पुल-तीन, पांच और सात
– झूंसी से परेड आने के लिए पांटून पुल-चार और छह
– पांटून पुल-एक और दो आपात स्थिति के लिए आरक्षित रहेंगे

स्नान के लिए घाट प्रबंधन
अरैल क्षेत्र
पक्का घाट, अरैल, सेल्फी पॉइंट, महाकाल आरती घाट, चक्र माधव घाट, सोमेश्वर महादेव घाट।

झूंसी क्षेत्र
संगम लोअर घाट, एरावत घाट, मोरी घाट, ओल्ड जीटी घाट, शिवाला घाट, दंडीबाड़ा घाट, आचार्यबाड़ा घाट, कल्पवासी घाट।
परेड संगम क्षेत्र
संगम नोज, संगम यमुनापट्टी घाट, संगम नोज, गंगापट्टी घाट, महावीर घाट पश्चिमी, रामघाट, काली घाट, मोरी घाट, शिवाला घाट पश्चिमी, दशाश्वमेध घाट, नागवासुकि घाट।

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