भोपाल, ब्यूरो : मध्य प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को मजबूती देने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आठ नए आयुर्वेद मेडिकल कालेज खोलने के लिए बजट की स्वीकृति मिल गई है। इसके लिए भारत सरकार ने नेशनल आयुष मिशन के तहत 490 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। विभागीय योजना के अनुसार, निर्माण कार्य तेज गति से पूरा कर वर्ष 2028 तक इन सभी कालेजों को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
दो चरणों में मिली स्वीकृति और पदों का सृजन
आयुष विभाग के अनुसार, इन कालेजों को दो चरणों में स्वीकृति मिली है। वर्ष 2024-25 के बजट में सागर, नर्मदापुरम, बालाघाट, शहडोल और मुरैना में मेडिकल कालेज खोलने को मंजूरी दी गई थी, जिनके लिए पदों का सृजन भी किया जा चुका है। वहीं, वर्ष 2025-26 के लिए झाबुआ और शाजापुर के कालेजों को हरी झंडी मिली है। डिंडोरी में प्रस्तावित आयुर्वेद कालेज के लिए जिला माइनिंग फंड से 105 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है।
केंद्र से मिलेगी आर्थिक सहायता
इन संस्थानों का निर्माण मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा किया जाएगा। भारत सरकार प्रत्येक मेडिकल कालेज के निर्माण के लिए 70 करोड़ रुपये की सहायता राशि देगी। वर्तमान में पांच कालेजों के लिए पदों की स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि शेष तीन मेडिकल कालेजों के लिए प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में भेजा जाएगा।
प्रदेश में आयुर्वेद का वर्तमान ढांचा और भविष्य की संभावनाएं
वर्तमान में प्रदेश में 07 सरकारी कालेज (भोपाल, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर, उज्जैन, इंदौर और बुरहानपुर) हैं। सरकारी कालेजों में बीएएमएस की 600 सीटें हैं और 27 निजी आयुर्वेद कालेज प्रदेश में संचालित हो रहे हैं। 2028 तक नए कालेजों के संचालन से आयुर्वेद चिकित्सकों की संख्या में भारी इजाफा होगा।
