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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क: मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में सरकारी स्कूलों के नए ड्रेस कोड नियमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। देश की करीब 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम होने के बावजूद सरकार ने ऐसे कपड़ों पर पाबंदी लगाई है, जिन्हें वह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ मानती है।

नए नियमों में हिजाब का नाम लेकर सीधी मनाही नहीं की गई, लेकिन धर्म से जुड़े दिखने वाले परिधानों को स्कूल में पहनने की अनुमति नहीं दी गई।

कई छात्राओं और शिक्षकों को हिजाब पहनकर स्कूल आने पर कक्षाओं में प्रवेश से रोक दिया गया। इसके विरोध में कम से कम दो स्कूलों में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया और प्रदर्शन शुरू हो गए।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, जिनमें छात्राएं स्कूल गेट पर रोती और अपनी शिक्षिकाओं से गले मिलती दिख रही हैं।

एक शिक्षिका जहरा हसानोवा ने कहा कि हिजाब पहनना व्यक्तिगत फैसला है और इसे जबरदस्ती उतारने या पहनने का दबाव नहीं होना चाहिए।

सरकार का तर्क है कि सभी छात्रों के लिए एक समान यूनिफॉर्म होनी चाहिए। खास मौकों पर सांस्कृतिक या पारंपरिक कपड़े पहनने की इजाजत स्कूल समिति की मंजूरी से दी जा सकती है। अजरबैजान का संविधान देश को धर्मनिरपेक्ष घोषित करता है, जबकि नागरिकों को धर्म मानने की आजादी भी देता है।

जेल में बंद पत्रकार पोलाद असलानोव ने भी इस फैसले के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू कर दी है। पड़ोसी देश तुर्किये में भी इस्तांबुल स्थित अजरबैजान दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने नियमों पर पुनर्विचार की मांग की।