BMC : नगर निगम पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन का कब्जा

मुंबई, संवाददाता : Mumbai-News भाजपा-शिंदे शिवसेना गठबंधन ने बीएमसी चुनाव जीत हासिल की है। सत्तारूढ़ गठबंधन ने ठाकरे परिवार को गढ़ को भेदते हुए 118 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार किया। किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं, मतगणना में देरी क्यों हुई, किन बड़े चेहरों को हार का सामना करना पड़ा। पढ़िए रिपोर्ट- 

ठाकरे परिवार को गढ़ को भेदते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) का गठबंधन शुक्रवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में कामयाब रहा। सत्तारूढ़ गठबंधन ने कुल 227 सीटों में से 118 सीट पर जीत दर्ज की। 

भाजपा ने 89 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। इस तरह राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन ने देश की सबसे अमीर नगर निगम को नियंत्रित करने के लिए जरूरी 114 का बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। 

किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं ?

शिवसेना (उद्धव गुट)-मनसे-एनसीपी (शरदचंत्र पवार) गठबंधन ने कुल 72 सीटों पर जीत हासिल की। विभाजित होने से पहले शिवसेना ने 1997 से 25 साल तक इस नगर निगम पर शासन किया। उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को कुल 65 सीटें मिलीं। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने छह सीटें हासिल कीं, जबकि शरद पवार गुट की एनसीपी को केवल एक सीट मिली। अन्य दलों में कांग्रेस को 24, एआईएमआईएम को आठ, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को तीन और समाजवादी पार्टी को दो सीटों पर जीत मिलीं। इन चुनावों में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की। यह चुनाव नौ साल के अंतराल के बाद हुए। 

पिछले बीएमसी चुनाव के नतीजे कैसे थे ?
2017 के बीएमसी चुनाव शिवसेना (अविभाजित) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और उसे 84 सीटें मिलीं। वहीं, भाजपा को 82 सीट पर जीत मिली थी, कांग्रेस को 21, एनसीपी को नौ, मनसे को सात, समाजवादी पार्टी को छह, एआईएमआईएम को दो, अखिल भारतीय सेना को एक और एक और अन्य को पांच सीटें मिली थीं। उस समय भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। 

मतगणना में देरी क्यों हुई ?
इस बार विभिन्न कारणों से मतगणना देरी से शुरू हुई। इसमें दोषपूर्ण ईवीएम, फिर से मतगणना की मांग और पहले चरण में मतगणना जैसी नई प्रक्रिया शामिल थी। मतगणना सुबह 10 बजे से शुरू की। नगर निगम आयुक्त और जिला चुनाव अधिकारी भूषण गागरानी ने बताया, मुंबई के घाटकोपर इलाके के एक वार्ड में मतगणना के समय ईवीएम की कंट्रोल यूनिट की नकली यूनिट का इस्तेमाल किया गया, जिसे प्रिंटिंग ऑक्सीलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) कहा जाता है। 

चुनाव में कई जाने-माने चेहरे हारे

इस चुनाव में कई कद्दावर पार्षद अपने गढ़ों में हार गए। जिन्हें हार का सामना करना पड़ा उनमें शिवसेना के पूर्व  विधायक सदा शंकर सरवणकर के बेटे समधान और बेटी प्रिया और बीईएसटी समिति के पूर्व अध्यक्ष अनिल कोकिल शामिल हैं, जो लालबाग से टिकट न मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे शिवसेना में चले गए। भाजपा के उम्मीदवार रवि राजा, विनोद मिश्रा, प्रीति पाटकर और राजुल समीर देसाई भी हार गए। इसके अलावा कांग्रेस की पूर्व पार्षद शीतल म्हात्रे, शिवसेना की दीप्ति वायकर और एनसीपी के कैप्टन मलिक को भी हार का सामना करना पड़ा।

पूर्व महापौर और शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार किशोरी पेडणेकर, विश्वका राऊत, श्रद्धा जाधव और मिलिंद वैद्य ने अपने-अपने वार्ड से जीत हासिल की। इसके अलावा, पूर्व उपमहापौर हेमांगी वोरलिकार और सुहास वडकर ने भी जीत दर्ज की।  मुंबई के सबसे अमीर उम्मीदवारों में से एक भाजपा के मकरंद नार्वेकर ने दक्षिण मुंबई के कोलाबा इलाके के एक वार्ड से जीत हासिल की। उनकी संपत्ति 124 करोड़ रुपये है। वह महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर के भाई हैं। राहुल नार्वेकर की भाभी हर्षिता और चचेरी बहन गौरवी शिवलकर-नार्वेकर ने भी क्रमशः वार्ड 225 और 227 से जीत दर्ज की।

सबसे कम मतदान किस वार्ड में हुआ?
कोलाबा के वार्ड 227 सबसे कम मतदान हुआ, जहां केवल 20.88 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला, जबकि पूरे शहर में 227 वार्ड का औसत 52.94 फीसदी रहा।

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