रिपब्लिक समाचार, न्यूज़ डेस्क : सतत अवसंरचना विकास के अपने संकल्प को दोहराते हुए National Highways Authority of India (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ‘पॉलिनेटर’ या ‘बी कॉरिडोर’ विकसित करने की अनूठी पहल की घोषणा की है। इस योजना के तहत सजावटी पौधों की जगह पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी पौधों की हरित पट्टी विकसित की जाएगी, जिसमें सालभर फूल देने वाले पेड़-पौधे लगाए जाएंगे ताकि मधुमक्खियों को लगातार पराग और मधुरस उपलब्ध हो सके।
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे की भूमि को पॉलिनेटर संरक्षण के लिए उपयोग करने से मधुमक्खियों और अन्य पॉलिनेटर पर बढ़ते पर्यावरणीय दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। इससे परागण सेवाओं, कृषि और बागवानी उत्पादन तथा समग्र पारिस्थितिक संतुलन को भी लाभ होगा।
इस पहल के तहत NHAI पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास का मिश्रण लगाएगा, जिसमें मधुरस और पराग से भरपूर प्रजातियाँ शामिल होंगी। साथ ही, ऐसे पौधों और संरचनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा जो मधुमक्खियों के प्राकृतिक आवास के लिए अनुकूल हों। पौधों का चयन इस तरह किया जाएगा कि अलग-अलग मौसम में फूल खिलते रहें और पूरे वर्ष निरंतर फूलों का चक्र बना रहे।
राजमार्गों के किनारे नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसे देशी पेड़ लगाए जाएंगे। स्थानीय जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त स्थानों पर ऐसे कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय 2026–27 के दौरान कम से कम तीन पॉलिनेटर कॉरिडोर विकसित करेंगे। साथ ही, इस अवधि में लगभग 40 लाख पेड़ लगाने की योजना है, जिनमें से करीब 60 प्रतिशत पेड़ ‘बी कॉरिडोर’ पहल के तहत लगाए जाएंगे।
यह पहल पारिस्थितिक संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल राजमार्ग विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
