नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : Pakistan Flood : पाकिस्तान में साल 2022 में आई विनाशकारी बाढ़ के लिए पाकिस्तानी किसान ने दो जर्मन कंपनियों पर केस किया है। यह विनाशकारी बाढ़ एक ऐसे देश के लिए जलवायु से जुड़ी एक बड़ी आपदा थी, जिसका वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में योगदान 1 प्रतिशत से भी कम है। पाकिस्तान सरकार ने इस आपदा का कारण, जलवायु परिवर्तन के प्रति देश की संवेदनशीलता को बताया।
जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने इस बाढ़ को जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हुई, बड़े पैमाने पर एक मानवीय आपदा करार दिया, जबकि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे स्टेरॉयड्स पर चल रहा मॉनसून बताया।
जर्मन कंपनियों को बाढ़ के लिए ठहराया जिम्मेदार
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंध वह इलाका है जो 2022 की बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। यहां के किसान इनायतुल्लाह लघारी ने दो जर्मन कंपनियों, REW और Heidelberg Materials पर उनके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर मुकदमा दायर किया है। किसानों का कहना है कि उन गैसों ने ही 2022 में आई विनाशकारी बाढ़ में योगदान दिया था।
REW का मुख्यालय जर्मनी के एसेन शहर में है और यह यूरोप की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनियों में से एक है। Heidelberg Materials का मुख्यालय जर्मनी के हाइडेलबर्ग शहर में है और यह दुनिया की सबसे बड़ी निर्माण सामग्री निर्माताओं में से एक है।
दोनों कंपनियां वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के 70% के लिए जिम्मेदार
कार्बन मेजर के आंकड़ों के अनुसार, यह एक जलवायु परिवर्तन थिंक टैंक है जो दुनिया के सबसे बड़े तेल, गैस, कोयला और सीमेंट उत्पादकों के ऐतिहासिक उत्सर्जन पर नजर रखता है। ये दोनों कंपनियां दुनिया भर के उन 178 औद्योगिक उत्पादकों में शामिल हैं, जो वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के 70 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं।
हाइडेलबर्ग की अदालत में दोनों कंपनियों पर मुकदमा
पाकिस्तानी किसानों ने पिछसे साल दिसंबर में हाइडेलबर्ग की एक अदालत में इन दोनों कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिस पर अभी भी सुनवाई चल रही है।
सागे-माब ने कहा कि इन दोनों कंपनियों का पाकिस्तान में कोई जमीनी परिचालन नहीं है, लेकिन मुकदमे में यह तर्क दिया गया है कि भौगोलिक निकटता न होने के बावजूद, जर्मनी में उनके द्वारा उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों का प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस किया जाता है। उनका कहना है कि किसानों के इस मुकदमे के सुनवाई तक पहुंचने की प्रबल संभावना है।
उनके अनुसार, इस मामले का महत्व इस बात को परिभाषित करने में मदद करने में निहित है कि जलवायु को होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी की गणना कैसे की जाए और उसे किसे सौंपा जाए। न केवल अदालतों में, बल्कि भविष्य की उन राजनीतिक वार्ताओं में भी जो जलवायु वित्त से संबंधित होंगी।
यह मामला एक पेरूवियन किसान से प्रेरित है, जिसने 2015 में इसी तरह के आरोपों पर RWE के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। हालांकि एक जर्मन अदालत ने 2025 में उस मामले को खारिज कर दिया था, लेकिन उसने यह फैसला भी दिया था कि कंपनियां, सैद्धांतिक रूप से, अपने कार्बन उत्सर्जन के कारण होने वाले विशिष्ट जलवायु-संबंधी नुकसानों के लिए जिम्मेदार ठहराई जा सकती हैं।
