नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि में नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान 6.05 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई, जो वित्त वर्ष 2016-17 के 5.5 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।
वार्षिक वृद्धि में 46% का उछाल
मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह उपलब्धि वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में लगभग 46% अधिक है। यह वृद्धि देश में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार और तैनाती को दर्शाती है।
कुल क्षमता 56 गीगावाट से अधिक
इस वृद्धि के साथ भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 गीगावाट के पार पहुंच गई है। यह उपलब्धि बेहतर नीतिगत स्पष्टता, मजबूत पारेषण व्यवस्था, प्रतिस्पर्धी टैरिफ और परियोजनाओं की उपलब्धता के कारण संभव हो सकी है।
इन राज्यों का रहा बड़ा योगदान
पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की अहम भूमिका रही है। इन राज्यों में पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
सरकारी नीतियों से मिली रफ्तार
सरकार ने पवन ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें टरबाइन निर्माण से जुड़े कच्चे माल पर रियायती सीमा शुल्क, जून 2028 तक अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्क में छूट, प्रतिस्पर्धी निविदा प्रणाली और नवीकरणीय ऊर्जा खपत दायित्व (आरसीओ) जैसे उपाय शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही भारत की स्थिति
मंत्रालय के मुताबिक, इन प्रयासों के चलते भारत वैश्विक पवन ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरा है। क्षेत्र में लगातार तकनीकी और नीतिगत सुधार देखने को मिल रहे हैं।
2030 के लक्ष्य की ओर तेज कदम
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। पवन ऊर्जा में यह रिकॉर्ड वृद्धि इस लक्ष्य को समय पर हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
