नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : नेपाल की राजनीति में एक नया और अलग चेहरा उभरकर सामने आया है। बालेन शाह ने अपने अनोखे अंदाज, साफ छवि और अलग सोच के दम पर सिर्फ 35 साल की उम्र में प्रधानमंत्री पद तक का सफर तय किया है। रैपर से नेता बने बालेन की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
साल 2022 में काठमांडू नगर निगम की बैठक का लाइव प्रसारण सोशल मीडिया पर किया गया। यह पहली बार था जब लोग मोबाइल पर देख पा रहे थे कि नेताओं के बीच अंदर क्या चर्चा होती है। इस कदम ने बालेन शाह को जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।
मेयर बनने के बाद उन्होंने शहर के बीच बने अवैध शोरूम और इमारतों पर बुलडोजर चलवाया। यह ऐसा कदम था, जो पिछले 30 सालों में किसी नेता ने नहीं उठाया था। इससे उनकी छवि एक सख्त और ईमानदार नेता की बनी।
प्रधानमंत्री बनने तक का सफर
इस मजबूत छवि के चलते बालेन शाह को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। 35 साल की उम्र में वे नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को रिकॉर्ड वोटों से हराया। चुनाव के दौरान उनका काला चश्मा भी चर्चा में रहा। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे अपनी आंखों के पीछे की रणनीति को छुपाकर रखना पसंद करते हैं।
बालेन शाह का जन्म 27 अप्रैल 1990 को नेपाल में हुआ था। उनके पिता डॉ. रामनारायण शाह आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। परिवार चाहता था कि वे भी डॉक्टर बनें, लेकिन बालेन की रुचि इंजीनियरिंग और कला में थी। उन्होंने कर्नाटक से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की पढ़ाई की। उनके बड़े भाई डॉक्टर हैं, लेकिन बालेन ने अलग रास्ता चुना।
प्रेम कहानी भी है खास
बालेन शाह की शादी 2018 में सबीना काफले से हुई। सबीना एक पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल और कवयित्री हैं। दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। बालेन, सबीना की कविताओं से प्रभावित हुए थे। बातचीत शुरू हुई और 2017 में एक साहित्यिक कार्यक्रम में पहली बार मिले। 2023 में दोनों के घर बेटी का जन्म हुआ।
बचपन से ही बालेन को कला और संगीत में रुचि थी। यह रुचि आगे चलकर हिप-हॉप और रैप में बदल गई। 2013 के रैप बैटल्स से वे युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए। 2021 में उन्होंने काठमांडू के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान किया और जीत हासिल की। 2026 में उन्होंने मेयर पद छोड़कर प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ा और जीत गए।
काम करने का अलग अंदाज
मेयर रहते हुए उन्होंने कई नए प्रयोग किए। नगर निगम की बैठकों का लाइव प्रसारण शुरू किया, ऑनलाइन बिडिंग सिस्टम लागू किया और गरीबों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच केंद्र खोले। उन्होंने निजी रेस्टोरेंट्स और होटलों के टॉयलेट्स को पब्लिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने का समझौता भी किया। इसके अलावा स्कूलों में ‘टेक्स्टबुक फ्री फ्राइडे’ जैसी पहल शुरू की।
बालेन शाह को 2023 में टाइम मैगजीन की टॉप 100 ग्लोबल फिगर्स में शामिल किया गया था। वे काठमांडू यूनिवर्सिटी में हेरिटेज स्ट्रक्चर के संरक्षण से जुड़े पीएचडी फेलो भी हैं। उन्होंने निजी स्कूलों के लिए यह नियम बनाया कि वे 10% बच्चों को स्कॉलरशिप दें। उनकी सबसे बड़ी ताकत सोशल मीडिया पर उनका मजबूत समर्थन है।
