कोलकाता, ब्यूरो : West Bengal news : पश्चिम बंगाल के कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापा पड़ा है। इस रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के ऑफिस और घर पहुंच गई। वो IPAC के दफ्तर से फाइल लेकर निकल गई हैं। सीएम ममता ने जहां आरोप लगाया है कि गृह मंत्री के इशारे पर मेरी पार्टी के कागज इकट्ठा हो रहे हैं। तो वहीं BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसी की जांच में बाधा डाल रही हैं।
सीएम ममता बनर्जी ईडी की रेड के बीच जब IPAC के दफ्तर पहुंची तो वो खाली हाथ थीं। वहीं, निकलते समय उनके हाथ में हरे रंग की फाइल नजर आ रही थीं। बताया जा रहा है कि सीएम ममता ने अपनी गाड़ी में फाइलें रखवाई हैं।
कोलकाता में ईडी की रेड
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय आज, 8 जनवरी को देशभर में 15 जगहों पर तलाशी ले रहा है। यह तलाशी एक संगठित गिरोह के खिलाफ फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले के सिलसिले में की जा रही है, जो लोगों को फर्जी नौकरियां देकर ठगी कर रहा था। इसी सिलसिले में कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के ऑफिस में ईडी ने छापेमारी की।
ईडी की टीम ने IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर छापे मारे। इस दौरान ईडी ने दस्तावेजों की जांच भी की जा रही थी। इस बीच ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गई और रेड के दौरान ही अपने साथ कुछ दस्तावेज लेकर वहां से चली आईं।
मेरी पार्टी के बारे में सारी जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं- CM ममता
इस पर ममता बनर्जी ने भड़कते हुए कहा, “क्या ED, अमित शाह का काम पार्टी की हार्ड डिस्क, कैंडिडेट लिस्ट इकट्ठा करना है? यह गृह मंत्री जो देश की रक्षा नहीं कर सकता और मेरे पार्टी के सारे डॉक्यूमेंट्स ले जा रहा है। अगर मैं BJP पार्टी ऑफिस पर रेड करूं तो क्या होगा? एक तरफ, वे पश्चिम बंगाल में SIR करवाकर सभी वोटर्स के नाम हटा रहे हैं। चुनावों की वजह से, वे मेरी पार्टी के बारे में सारी जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं।”
शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा ?
पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “मैं रेड पर कोई कमेंट नहीं करूंगा; ED बताएगी कि रेड क्यों हो रही है। CM ममता बनर्जी का सेंट्रल एजेंसियों के काम में रुकावट डालने का इतिहास रहा है। ममता ने आज जो किया, वह जांच में रुकावट डालना था। 2021 में, वह CBI ऑफिस के बाहर धरने पर बैठी थीं। स्वाभाविक रूप से, मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह की कार्रवाई, संवैधानिक संस्थानों के काम में सीधा दखल और जांच में रुकावट डालना, एक मुख्यमंत्री के लिए निंदनीय है, जो सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं बल्कि एक प्रशासनिक अधिकारी भी हैं।”
