shudhansu-trivedi

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क :  कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहे जाने पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।

लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि केवल समितियां गठित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि राधाकृष्णन समिति की एक भी प्रमुख सिफारिश अब तक लागू नहीं की गई है।

इसी क्रम में उन्होंने परीक्षा सुधार के लिए गठित नई टास्क फोर्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें पूर्व आइबी प्रमुख, एक आइटी कंपनी के मालिक और यहां तक कि “गोमूत्र विशेषज्ञ” को भी शामिल किया गया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रति नकारात्मक सोच को बढ़ावा दे रही है

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा कि यदि वह ‘जेन-जी’ का विश्वास जीतना चाहते हैं तो उन्हें “कैमरे के एंगल नहीं, दिल का एंगल बदलना होगा” और अपने सलाहकारों में भी बदलाव करना चाहिए।

प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रति नकारात्मक सोच को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू काल से कांग्रेस पश्चिमी सोच से प्रभावित रही, जिसके कारण देश अपने पारंपरिक ज्ञान के कई स्रोतों से दूर होता गया।

त्रिवेदी ने दावा किया कि अमेरिका ने गोमूत्र में मौजूद कुछ एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों को मान्यता देते हुए उससे जुड़े पेटेंट भी दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस भारतीय परंपराओं को गंभीरता से लेती, तो हल्दी, नीम और तुलसी जैसे पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए विदेशों में कानूनी लड़ाइयां नहीं लड़नी पड़तीं।

गौरतलब है कि पद्म पुरस्कार से सम्मानित आइआइटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि केंद्र सरकार द्वारा नीट पेपर लीक विवाद के बाद गठित छह सदस्यीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के सदस्य हैं। जनवरी 2025 में पोंगल के अवसर पर उन्होंने एक गोशाला में गोमूत्र से जुड़ा एक प्रसंग साझा किया था, जिसे लेकर विवाद हुआ था। बाद में उन्होंने कहा था कि उनकी टिप्पणी प्रकाशित विज्ञानी अध्ययनों के संदर्भ पर आधारित थी।