जयपुर, डिजिटल डेस्क: राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर एक प्राइवेट होस्पिटैलिटी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया और खुद व परिवार के सदस्यों के नाम पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर कई रिजॉर्ट विला खरीदे। शिखर अग्रवाल हाल तक उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर थे। जांच में उनके और गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड (जो अनंता ब्रांड के तहत होटल और रिजॉर्ट संचालित करती है) के निदेशकों के बीच कथित संबंधों की पड़ताल की जाएगी। क्या है आरोप ? एसीबी की प्रारंभिक जांच में दो अनंता रिजॉर्ट संपत्तियों पर कई विला की खरीद का पता चला है: उदयपुर के बुझड़ा में मार्च 2026 में 20 विला खरीदे गए। इनमें से 10 शिखर अग्रवाल और 10 उनकी पत्नी आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर के नाम पर पंजीकृत हैं। प्रत्येक विला करीब 15 लाख रुपये में खरीदा गया। अलवर के अजबगढ़ में 16 विला खरीदे गए। इनमें से 8 दंपति के नाम पर (प्रत्येक करीब 16.5 लाख रुपये), 4 उनके दो बेटों के नाम पर (करीब 15 लाख रुपये प्रत्येक) और 4 ससुराल वालों के नाम पर (करीब 16.5 लाख रुपये प्रत्येक)। कुल मिलाकर दोनों जगहों पर 36 विला की खरीद का जिक्र है। इनकी कुल कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कुछ रिपोर्टों में 40 विला-कॉटेज और 6.16 करोड़ रुपये की बात भी कही गई है। एसीबी का आरोप है कि शिखर अग्रवाल ने कंपनी को रिजॉर्ट निर्माण में छूट, बिना जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच के मंजूरी और विशेष रियायती वित्तीय पैकेज जैसे लाभ दिए। एक आरोप यह भी है कि 27 मार्च 2026 को ही वित्त विभाग ने कंपनी को विशेष पैकेज दिया और उसी दिन उदयपुर के 20 विला उनके और पत्नी के नाम पर पंजीकृत हुए। दोनों अधिकारियों को APO पर भेजा गया शिखर अग्रवाल (1993 बैच IAS) को पहले ही सभी पदों से हटाकर अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर्स पर भेज दिया गया था। शनिवार को उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर (1995 बैच IPS) को भी APO पर रख दिया गया। वे प्लानिंग, मॉडर्नाइजेशन और वेलफेयर की अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर थीं। Post navigation भूटान में ग्लेशियल झील फटने की चेतावनी, उत्तर बंगाल में बाढ़ का हाई-अलर्ट न्यूजीलैंड ए के खिलाफ तीसरे मैच से ऋषभ पंत हुए बाहर