Kanpur : राज्यपाल से बोली छात्राएं, देर से मिलती स्कॉलरशिप

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कानपुर, संवाददाता :सीएसए के निरीक्षण में आई राज्यपाल ने छात्रावास में छात्राओं से संवाद किया।  शैक्षणिक, आवासीय और दैनिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं जानीं।

मेस में खाना मिल रहा है या नहीं। खाने की गुणवत्ता कैसी है….यह जानकारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार शाम चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के निरीक्षण के दौरान गोदावरी छात्रावास की छात्राओं से ली। छात्राओं ने खाने की गुणवत्ता को सही बताया। उन्होंने छात्रवृत्ति के बारे में पूछा तो छात्राओं ने देरी से मिलने की बात कही। उन्होंने डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. मुनीश गंगवार से कहा कि इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। समाज कल्याण विभाग से समन्वय कर समस्या का निस्तारण करें।

रविवार शाम करीब 4:15 बजे राज्यपाल का काफिला सबसे पहले कॉलेज ऑफ कम्यूनिटी साइंस पहुंचा। इसके बाद राज्यपाल गोदावरी गर्ल्स हॉस्टल पहुंचीं जहां छात्राओं से सीधे बातचीत की। उन्होंने छात्राओं के शैक्षणिक, आवासीय और दैनिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं जानीं। छात्राओं ने बताया कि छात्रवृत्ति समय से न मिलने के कारण फीस, किताबों और अन्य खर्चों को लेकर दिक्कतें आती हैं। इस पर राज्यपाल ने कहा कि इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। राज्यपाल ने स्वयं वाटर कूलर से पानी लेकर उसकी स्थिति जांची। छात्राओं के लिए मंगाई गई नई वाशिंग मशीन का शुभारंभ किया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में चल रही शैक्षणिक एवं विकास परियोजनाओं, पूर्व में दिए गए निर्देशों और लंबित मामलों की समीक्षा के लिए विवि के अधिकारी, डीन, डायरेक्टर और प्रोफेसरों के साथ बैठक की

इसके बाद राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में चल रही शैक्षणिक एवं विकास परियोजनाओं, पूर्व में दिए गए निर्देशों और लंबित मामलों की समीक्षा के लिए विवि के अधिकारी, डीन, डायरेक्टर और प्रोफेसरों के साथ बैठक की। निर्माण कार्यों, छात्र सुविधाओं और प्रशासनिक मामलों की धीमी प्रगति पर असंतोष जताया और सभी कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

इससे पहले आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह के दौरान अपनी टीम से हॉस्टल का निरीक्षण कराया था। तब छात्रों ने गंदगी, खाने की गुणवत्ता, शिक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। जिसके बाद उन्होंने दीक्षांत में अपने अध्यक्षीय भाषण में विवि प्रशासन को खरी-खोटी सुनाई थी। इसके कुछ समय बाद तत्कालीन कुलपति ने इस्तीफा दे दिया था। फिर कार्यभार मंडलायुक्त को सौंपा गया। इस बीच में लगातार राजभवन से टीमें संस्थान का निरीक्षण करती रहीं।

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