नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने अब तक रेपो रेट में 1.25% की कटौती की है और चालू वित्त वर्ष में ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के तहत करीब 6.6 लाख करोड़ रुपए की नकदी बाजार में डाली है। इसके बावजूद सरकारी बॉन्ड और अन्य निवेश साधनों पर मिलने वाला ब्याज अपेक्षा के अनुरूप कम नहीं हुआ है। यह बात बुधवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में कही गई।
नकदी के असर में दिखी असमानता
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में तरलता डालने के बाद भी बाजार के सभी हिस्सों में इसका असर समान रूप से नहीं दिख रहा है। रिपोर्ट में इसे ‘असमान ट्रांसमिशन’ बताया गया है, यानी कहीं ब्याज दरों पर असर ज्यादा है तो कहीं बेहद सीमित।
अब तक का सबसे बड़ा ओपन मार्केट ऑपरेशन
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा ओपन मार्केट ऑपरेशन मौद्रिक नीति के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग है, जो पहले कभी नहीं देखा गया। यदि इसमें नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के जरिए डाली गई नकदी, खरीद-बिक्री स्वैप और करेंसी लीकेज को भी जोड़ दिया जाए, तो कुल मिलाकर लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपए की तरलता बाजार में डाली जा चुकी है।
बैंकों की कर्ज दरों में तेजी से गिरावट
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि एक सकारात्मक संकेत यह है कि बैंकों की कर्ज दरों में अपेक्षाकृत ज्यादा गिरावट आई है। इसके चलते बैंकों की कर्ज दरों और कॉरपोरेट बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज के बीच का अंतर कम हुआ है।
बाजार के बजाय बैंकों से कर्ज ले रहीं कंपनियां
डॉ. घोष के अनुसार, इसी वजह से कंपनियां अब बाजार से बॉन्ड जारी कर पूंजी जुटाने की बजाय बैंकों से कर्ज लेना ज्यादा फायदेमंद मान रही हैं। यह रुझान खासतौर पर अच्छी रेटिंग वाली बड़ी कंपनियों में ज्यादा देखने को मिल रहा है।
ईबीएलआर से जुड़े कर्जों पर दिखा असर
रिपोर्ट में बताया गया कि बैंकों के करीब 65% कर्ज बाहरी बेंचमार्क आधारित कर्ज दर (ईबीएलआर) से जुड़े हैं। इसी कारण आरबीआई की ब्याज दर कटौती का असर बैंकों की कर्ज दरों पर तेजी से पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप नए रुपए कर्ज पर औसत ब्याज दर 2025 में 62 बीपीएस घटकर नवंबर 2025 में 8.71% रह गई।
मुद्रा बाजार की ब्याज दरों में बढ़ोतरी
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगस्त 2025 से मुद्रा बाजार की ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखी गई। दिसंबर में भी ब्याज दरें नवंबर की तुलना में अधिक रहीं, जबकि उस दौरान मौद्रिक नीति को और नरम किया गया था। बॉन्ड बाजार में भी 10 वर्षीय एएए कॉरपोरेट बॉन्ड की यील्ड, जो जून की शुरुआत तक घटी थी, उसके बाद बढ़ने लगी।
राज्यों के कर्ज में ज्यादा दिखी विषमता
रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज यानी स्टेट डेवलपमेंट लोन में यह विषमता और ज्यादा स्पष्ट है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच राज्यों के कर्ज पर औसत ब्याज दर 7.16% रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में केवल 0.07% कम है।
आरबीआई के फैसलों से बन सकती हैं नई रणनीतियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 दिन के लिए लिए गए रेपो ऋण को समय से पहले चुकाने का आरबीआई का फैसला वैश्विक स्तर पर दुर्लभ है। इससे अल्पकाल में बाजार में कुछ अस्थिरता आ सकती है, लेकिन यह भी संकेत है कि आरबीआई तरलता प्रबंधन में नए प्रयोग कर रहा है, जिससे बाजार में बोली लगाने की नई रणनीतियां विकसित हो सकती हैं।
ज्यादा ट्रेड होने वाले बॉन्ड पर ओएमओ की सलाह
एसबीआई की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आरबीआई को ओपन मार्केट ऑपरेशन ऐसे बॉन्ड में करना चाहिए, जिनमें ज्यादा खरीद-बिक्री होती है। इससे ब्याज दरों को लेकर बाजार को स्पष्ट संकेत मिलेगा और अलग-अलग क्षेत्रों में निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
