उदयपुर, संवाददाता : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी के स्थापना दिवस को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके की ओर इशारा करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में ‘व्हाइट-कॉलर टेररिजम’ जैसी चिंताजनक प्रवृतियां सामने आ रही हैं जहां अत्यंत शिक्षित लोग समाज और राष्ट्र के विरुद्ध कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बहुत शिक्षित लोग भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा, ‘‘धर्म और नैतिकता से विहीन शिक्षा समाज के लिए उपयोगी नहीं होती है तथा कभी-कभी यह घातक भी सिद्ध हो जाती है। शायद यही कारण है और बहुत बड़ी विडंबना है कि बहुत शिक्षित लोग भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं।’’ उन्होंने कहा,‘‘आज ‘व्हाइट कॉलर टेररिजम’ जैसी चिंताजनक प्रवृतियां देशवाशियों के सामने आ रही हैं, जहां अत्यंत शिक्षित लोग समाज और राष्ट्र के विरुद्ध कार्य करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हाल में दिल्ली में ‘बम विस्फोट’ करने वाला कौन था? डॉक्टर थे। वरना जो डॉक्टर पर्चे पर हमेशा ‘आरएक्स’ लिखकर प्रस्रिक्प्शन लिखते हैं उन डॉक्टरों के हाथ में ‘आरडीएक्स’ हो? इसलिए आवश्यक है कि ज्ञान के साथ साथ संस्कार भी होना चाहिए। चरित्र भी होना चाहिए।’’
‘नॉलेज इकोनॉमी’ के रूप में उभर रहा भारत’
राजनाथ सिंह ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास है कि हम भारतीय शिक्षा के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए उसे नए युग के साथ तालमेल बनाए रखने के लायक भी बनाएं।’’ उन्होंने कहा,‘‘प्रौद्योगिकी में बदलाव आ रहा है। उससे एआई, मशीन लर्निंग तथा अन्य तकनीकी हमारे जीवन और काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल रही है। हमें इनका सकारात्मक इस्तेमाल करते हुए भारत के विकास को नई गति देनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि भारत आज ‘नॉलेज इकोनॉमी’ के रूप में उभर रहा है तथा 2014 में ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ में भारत की रैंकिंग 76 थी जो 2024 में 39 हो गयी है, यह दूरदर्शी सुधारों के कारण हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है,‘हम 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ आत्मविश्वास से बढ़ रहे है।’ राजनाथ सिंह ने यह भी कहा, ‘‘मैं विश्वास से कह सकता हूं कि आने वाले 15-20 साल में हमारा भारत हथियारों के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन जायेगा।’’ उन्होंने विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ साथ विनय, चरित्र एवं धर्मबोध पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘विद्या से विनय आती है, विनय से योग्यता आती है, उससे समृद्धि, समृद्धि से धर्म और अंततः धर्म से ही सच्चा सुख मिलता है। कोई भी शिक्षा व्यवस्था जो ज्ञान के साथ विनय, चरित्र और धर्म बोध नहीं देती है उसे सफल नहीं कहा जा सकता।’’
