लखनऊ, डॉ.जितेंद्र बाजपेयी : उत्तर प्रदेश विधान भवन में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि इस सम्मेलन में हुई सार्थक चर्चा और संवाद से विधायी संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा तय हुई है। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान नवाचारों पर सहमति बनी, जिससे संस्थाएं जनता के और अधिक करीब पहुंचेंगी।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सम्मेलन में लिए गए निर्णयों और पारित संकल्पों को धरातल पर उतारने की दिशा में सभी आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए हैं, जिनमें विधायिकाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने, तकनीक के उपयोग और जनभागीदारी को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर है।
विधानसभाओं की लगातार घटती बैठकों की संख्या पर चिंता व्यक्त की
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में 36 घंटे तक चपरंपराओंली चर्चा में वर्ष 2047 के विजन डॉक्यूमेंट पर गंभीर मंथन हुआ, जो लोकतांत्रिक के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है। उन्होंने यह भी बताया कि सम्मेलन में विधानसभाओं की लगातार घटती बैठकों की संख्या पर चिंता व्यक्त की गई और इसे बढ़ाने पर व्यापक सहमति बनी। यदि विधानसभाओं में सकारात्मक सोच के साथ काम किया जाए, तो निश्चित रूप से बेहतर और परिणामोन्मुखी निर्णय सामने आएंगे। सदन की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई है।
ओम बिरला ने कहा कि आगामी समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग से सांसदों और विधायकों की क्षमता संवर्धन किया जाएगा, ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से जनहित के मुद्दों को उठा सकें और आधुनिक चुनौतियों का समाधान कर सकें। उनकी सबसे बड़ी चिंता सदन में लगातार हो रहा गतिरोध और व्यवधान है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सदन का समय अत्यंत कीमती है और इसका उपयोग चर्चा और संवाद के लिए होना चाहिए, न कि हंगामे के लिए। सभी राजनीतिक दलों से संवाद कर गतिरोध दूर करने का संकल्प लिया गया है और हंगामा सदन के बाहर होना चाहिए। पीठासीन अधिकारी लोकतांत्रिक संस्थाओं के संरक्षक होते हैं और जनता उनसे निष्पक्षता व जवाबदेही की अपेक्षा करती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संवैधानिक संस्थाओं में जनभागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।
