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संभल, संवाददाता : संभल के कसेरुआ गांव में अवैध तरीके से बनाई गई दो मंजिला मस्जिद को तोड़ दिया गया है।  अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दाैरान भारी पुलिस बल की मौजूद रहा। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

नखासा क्षेत्र के कसेरुआ गांव में कब्रिस्तान की सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद मुस्तफा कादरी को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। प्रशासन ने तहसीलदार कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की। करीब 120 वर्गमीटर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। मस्जिद की 55 फीट ऊंची मीनार को हाइड्रा मशीन से ढहाया गया।

इस दौरान गांव में भारी फोर्स को तैनात किया गया और निगरानी के लिए जवान लगाए गए। डीएम और एसपी भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने कार्रवाई को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। चार बुलडोजर लगाकर कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई शाम तक पूरी की गई।  कार्रवाई के दौरान मस्जिद की पहली मंजिल से आई लव मोहम्मद लिखे पोस्टर और हरे रंग का झंडा मिला है।

एसपी ने ऐसे पोस्टर छपवाने वालों पर कार्रवाई कराए जाने की बात कही है

एसपी ने ऐसे पोस्टर छपवाने वालों पर कार्रवाई कराए जाने की बात कही है। मस्जिद ढहाने के लिए नगर पंचायत सिरसी से चार बुलडोजर, डंपर ट्रैक्टर और 20 सफाईकर्मी लगाए गए। कार्रवाई से पहले मुस्लिम समाज के लोगों ने मस्जिद में नमाज अदा की। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने मस्जिद के आसपास के घरों को खाली कराया। गांव में सुरक्षा के लिए 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

21 अप्रैल को किया गया था बेदखली का आदेश
तहसीलदार कोर्ट ने 21 अप्रैल को मस्जिद कमेटी के खिलाफ बेदखली का आदेश दिया था। मस्जिद कमेटी ने डीएम कोर्ट में अपील की थी। हालांकि, आदेश रोकने का कोई फैसला नहीं किया गया। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने मस्जिद मामले में एक टीम का गठन कर कार्रवाई की गई है।

मुतवल्ली बोले 50 लाख रुपये लगाए गए थे 
मस्जिद के मुतवल्ली जाकिर हुसैन ने बताया कि यह मस्जिद वर्षों पुरानी है। करीब 25 वर्ष पहले इसका पुनर्निर्माण कराया गया था। इस पर 50 लाख रुपये से अधिक की लागत आई थी। वहीं, दूसरी ओर ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार कोर्ट में उनके पक्ष को ठीक से नहीं सुना गया। ग्रामीण जावेद ने कहा कि उन्हें तोड़ने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। टीम ने अचानक से कार्रवाई की है।

शिकायत के आधार पर आगे बढ़ी कार्रवाई
तहसीलदार ने बताया कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार, गाटा संख्या 409 कब्रिस्तान की जमीन है। इसी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया। बताया कि गांव के लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि सुरक्षित कराने की शिकायत की थी। जांच में कब्रिस्तान की जमीन पर मस्जिद बनाकर कब्जा पाया गया। सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी कोई दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई। इसके चलते कार्रवाई की गई है। बताया कि जनवरी में लेखपाल की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था।

लेकिन मस्जिद कमेटी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी और निर्माण सरकारी जमीन पर होने की पुष्टि हुई

बेदखली का आदेश तहसीलदार कोर्ट से किया गया था। इसके बाद डीएम कोर्ट में अपील की गई थी। दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया गया लेकिन मस्जिद कमेटी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी और निर्माण सरकारी जमीन पर होने की पुष्टि हुई। इसी क्रम में कार्रवाई की गई है। जिलेभर में अवैध कब्जों पर कार्रवाई लगातार जारी है। डीएम, संभल।
 
मस्जिद में कुछ पोस्टर और एक झंडा मिला है। उसकी जांच कराई जाएगी। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी करेंगे। अवैध कब्जे को पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में हटा दिया गया है। कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी, संभल।

मजार ध्वस्त कर खाली कराई सरकारी जमीन
इससे पहले बबराला थाना क्षेत्र के गांव बाघऊ में शुक्रवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलवाकर एक मजार को ध्वस्त करा दिया। अफसरों के मुताबिक यह मजार सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई गई थी। इस मामले की सुनवाई के बाद डीएम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान डीएम और एसपी भी मौके पर मौजूद रहे।

लेकिन मस्जिद कमेटी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी और निर्माण सरकारी जमीन पर होने की पुष्टि हुई

राजस्व टीम और चार थानों की पुलिस की मौजूदगी में शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे से एक घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान करीब 100 वर्ग गज जमीन मजार के ध्वस्तीकरण के बाद खाली कराई गई। अधिकारियों ने बताया कि गांव बाघऊ में गाटा संख्या 592 की भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है।

इस पर कब्जा कर लगभग एक दशक पूर्व मजार बना ली गई थी। मजार की देखरेख इसी गांव के निवासी मुजावर अब्दुल अजीज द्वारा की जा रही थी। लेखपाल की शिकायत पर करीब छह माह पूर्व मामला तहसील न्यायालय में और फिर जिलाधिकारी कोर्ट में पहुंचा। संबंधित पक्षों की सुनवाई में इस स्थान के सरकारी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद डीएम न्यायालय ने इस अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया था।

मौके पर मौजूद डीएम ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जिले में तालाबों, चकमार्ग व अन्य सरकारी जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जहां भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।