नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। हालांकि, इसका असर आम लोगों को फिलहाल पंप पर कीमतों में कमी के रूप में नहीं मिलेगा।
सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें पहले की तरह ही रहेंगी। यह कटौती तेल कंपनियों (OMCs) को हो रहे नुकसान को कम करने के लिए की गई है।
सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण हुई है।
इस समय तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 26 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर रोजाना करीब 2,400 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है।
सरकार द्वारा की गई 10 रुपये की कटौती से इस नुकसान का कुछ हिस्सा कम होगा, जिससे कंपनियां बिना बाधा के आपूर्ति जारी रख सकेंगी और कीमतें स्थिर रहेंगी।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे — या तो कीमतें बढ़ाई जाएं या सरकार खुद आर्थिक बोझ उठाए। सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए दूसरा विकल्प चुना।
इसके साथ ही सरकार ने डीजल के निर्यात पर टैक्स (लेवी) भी लगाया है, ताकि देश के अंदर पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और जरूरत पड़ने पर निर्यात कम किया जा सके।
सरकार का कहना है कि वह आगे भी वैश्विक स्थिति पर नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर कदम उठाती रहेगी।
