अलीगढ , संवाददाता : कभी 1100 काले हिरणों से आबाद रहा अलीगढ़ का पला सल्लू काला हिरण संरक्षण केंद्र अब बदहाली की तस्वीर बन चुका है। 63 हेक्टेयर में फैले इस केंद्र में वर्तमान में सिर्फ 40 से 50 काले हिरण ही बचे हैं।
सूखे तालाब, सुरक्षा व्यवस्था का अभाव और अवैध कटान के चलते हिरण जंगल छोड़ खेतों और सड़कों की ओर भटक रहे हैं, जहां वे हादसों और जंगली कुत्तों का शिकार बन रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर गभाना क्षेत्र के गांव पला सल्लू में वर्ष 2003-04 में 63 हेक्टेयर क्षेत्रफल में काला हिरण संरक्षण केंद्र स्थापित किया गया था।
वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक उस समय यहां करीब 1100 काले हिरण मौजूद थे। हिरणों के लिए चार तालाब, वाच टावर और पर्यटकों के बैठने के लिए झोपड़ियां व बेंच बनाई गई थीं। संरक्षण केंद्र की देखरेख के लिए कर्मचारियों की तैनाती भी की गई थी और शुरुआती वर्षों में शासन से पर्याप्त बजट मिलता रहा।
समय बीतने के साथ व्यवस्थाएं धीरे-धीरे ध्वस्त होती चली गईं
समय बीतने के साथ व्यवस्थाएं धीरे-धीरे ध्वस्त होती चली गईं। वर्तमान में संरक्षण केंद्र के तालाब सूख चुके हैं और पानी की व्यवस्था के लिए लगाए गए दो ट्यूबवेल भी बंद पड़े हैं। चहारदीवारी और तारबंदी न होने से हिरण संरक्षण केंद्र से बाहर निकल जाते हैं। वहीं, जंगल में अवैध कटान भी लगातार जारी है। अब यह संरक्षण केंद्र हिरणों से ज्यादा निराश्रित पशुओं का ठिकाना बनकर रह गया है।
तेजी से घटी काले हिरणों की संख्या :
स्थापना के समय 1100 हिरणों वाले इस संरक्षण केंद्र में वर्ष 2011 में संख्या घटकर 146 रह गई थी। वर्ष 2013 में यह संख्या बढ़कर 235 और 2015 में करीब 350 तक पहुंची, लेकिन वर्तमान में यहां केवल 40 से 50 काले हिरण ही बचे हैं।
गांव पला नगलिया निवासी प्रेमपाल सिंह का कहना है कि पहले यहां बड़ी संख्या में काले हिरण दिखाई देते थे और पर्यटक भी आते थे, लेकिन अब व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। हिरणों के लिए बनाए गए तालाब सूखे पड़े हैं।
पला सल्लू के नागेंद्र सिंह ने बताया कि अब जंगल में घंटों घूमने के बाद भी मुश्किल से एक-दो काले हिरण दिखाई देते हैं। गर्मियों में पानी की कमी के कारण हिरण खेतों की ओर चले जाते हैं, जहां कुत्ते उन्हें नोंचकर खा जाते हैं।
पला सल्लू काला हिरण संरक्षण केंद्र के सुंदरीकरण के लिए शासन को नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा। जल्द ही चहारदीवारी, तालाबों की मरम्मत और पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। साथ ही केंद्र की देखरेख के लिए कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी। -शिवम कुमार, प्रभागीय वन अधिकारी
