नई दिल्ली.डिजिटल डेस्क : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि ‘सेवा’ को अहसान नहीं, बल्कि कर्तव्य समझना चाहिए।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नि:स्वार्थ सेवा से मन शुद्ध होता है। वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिवंगत पिता गंगाधरराव फडणवीस के नाम पर बने डायग्नोस्टिक सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने सेवा के गहरे अर्थ को समझाते हुए कहा कि इसमें स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए काम करना शामिल है। हमारे यहां ‘सेवा’ शब्द की एक अलग अवधारणा है। सेवा कोई अहसान नहीं, बल्कि कर्तव्य है। सेवा करने से हमारा मन शुद्ध होता है, क्योंकि मनुष्य का मन स्वाभाविक रूप से अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के दोषों से भरा होता है। सेवा मन को शुद्ध करती है, क्योंकि इसमें स्वयं को भूलकर दूसरों की सेवा करना शामिल है।
भागवत ने सेवा कार्यों के पीछे की विभिन्न प्रेरणाओं की ओर भी ध्यान दिलाया और व्यक्तिगत लाभ या क्षणिक हितों से प्रेरित प्रथाओं के प्रति आगाह किया।
उन्होंने कहा कि कभी-कभी हम देखते हैं कि बड़ी संख्या में लोग सेवा कर रहे हैं। हम सोचते हैं कि चुनाव नजदीक हैं, इसलिए कई लोग सेवा में शामिल हो रहे हैं। लेकिन चुनाव के बाद या जीतने के बाद भी उनमें से कितने लोग सेवा करते नजर आते हैं।
आरएसएस प्रमुख ने आग्रह किया कि संघ को बेहतर ढंग से समझने के लिए इसे राजनीतिक नजरिये के बजाय मानवीय नजरिये से देखा जाना चाहिए। संघ को राजनीतिक नजरिये से न देखें, बल्कि इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए मानवीय ²ष्टिकोण से देखें। संघ सनातन धर्म के उत्थान की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।
