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नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क : भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सिडबी-आरआरबी एमएसएमई को-लेंडिंग सुविधा के विस्तार को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित किया। वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) के सचिव संजय लोहिया की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में सिडबी के मुख्य कार्यकारी निदेशक मनोज मित्तल, डीएफएस, सिडबी और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्ष मौजूद रहे।

सम्मेलन में डीएफएस सचिव ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में एमएसएमई की ऋण तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में सिडबी की एमएसएमई की क्रेडिट जरूरतों को समझने की विशेषज्ञता और आरआरबी की छोटे कस्बों तथा गांवों तक व्यापक पहुंच का लाभ उठाया जा सकता है।

आरआरबी के लोन पोर्टफोलियो में आएगा विविधीकरण

सिडबी-आरआरबी को-लेंडिंग व्यवस्था से आरआरबी को एमएसएमई लेंडिंग पर ध्यान केंद्रित करके अपने लोन पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। नियम-आधारित अंडरराइटिंग से बैंकों को अच्छी परिसंपत्ति गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता मिलने की संभावना है।

एमएसएमई क्लस्टर डेटा के इस्तेमाल पर जोर

डीएफएस के अतिरिक्त सचिव ने एमएसएमई क्लस्टर डेटा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस डेटा के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में एमएसएमई तक पहुंच बनाने के लिए लक्षित रणनीति तैयार की जा सकती है। उन्होंने आरआरबी से देश को अगली पीढ़ी का विनिर्माण केंद्र बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

रोजगार मेलों में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने की अपील

अतिरिक्त सचिव ने कहा कि आरआरबी को एमएसएमई के बीच वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों की ओर से आयोजित रोजगार मेलों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। डीएफएस के संयुक्त सचिव ने सुझाव दिया कि आरआरबी इस को-लेंडिंग सुविधा के जरिए एमएसएमई को ऋण उपलब्ध कराने को अपनी शाखाओं के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाएं।

सिडबी ने आरआरबी से आगे आने का किया आग्रह

सिडबी के सीएमडी ने आरआरबी से को-लेंडिंग व्यवस्था को सफल बनाने के लिए सक्रिय रूप से आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आरआरबी की जमीनी पहुंच का लाभ उठाकर एमएसएमई क्षेत्र की ऋण जरूरतों को व्यापक स्तर पर पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से कागजरहित होगी ऋण प्रक्रिया

सिडबी की ओर से विकसित को-लेंडिंग मंच एक संपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो ऋण प्रक्रिया को तेज और कागजरहित बनाता है। इसके जरिए लोन की स्वीकृति और वितरण में लगने वाला समय कम किया जा सकता है। आवेदन पोर्टल पर सभी आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने के बाद आवेदकों को कम समय में सैद्धांतिक मंजूरी की सूचना दी जाती है।

शाखा गए बिना सीधे खाते में पहुंचेगा लोन

डिजिटल दस्तावेजीकरण और वितरण प्रक्रिया के जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि ग्राहक को प्रक्रिया के किसी भी चरण में शाखा जाने की जरूरत न पड़े। स्वीकृत लोन सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में वितरित किया जा सकता है।

तीन आरआरबी में पायलट के उत्साहजनक परिणाम

सिडबी के मुताबिक, तीन आरआरबी में इस व्यवस्था के पायलट कार्यान्वयन के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। अधिक आरआरबी में को-लेंडिंग कार्यक्रम का विस्तार होने से विशेष रूप से सूक्ष्म और लघु उद्यमों को ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऋण की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलने की उम्मीद है।