नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाले सोलर अलायंस सहित 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका अब अलग हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक मेमोरेंडम पर साइन किए।
जिसमें अमेरिका को उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों, कन्वेंशनों और संधियों से बाहर निकलने का निर्देश दिया गया है जो अमेरिका के हितों के खिलाफ हैं।
यह घोषणा व्हाइट हाउस द्वारा शेयर किए गए प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडा के बयान में की गई, जिसमें 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से बाहर निकलने का जिक्र किया गया है।
इन संस्थानों से अलग हुआ अमेरिका
गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों में भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज जैसे प्रमुख पर्यावरण निकाय शामिल हैं।
अन्य गैर-संयुक्त राष्ट्र निकायों में इंटरनेशनल एनर्जी फोरम, इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी, पार्टनरशिप फॉर अटलांटिक कोऑपरेशन और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम और अन्य शामिल हैं।
यूएन के इन प्रमुख संगठनों से बाहर निकला अमेरिका
जिन प्रमुख संयुक्त राष्ट्र संगठनों से अमेरिका बाहर निकला है, उनमें डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स, इंटरनेशनल लॉ कमीशन, इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, पीस बिल्डिंग कमीशन, यूएन एनर्जी और यूएन पॉपुलेशन फंड और यूएन वाटर शामिल हैं।
कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि ट्रंप ने सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को मेमोरेंडम में बताए गए संगठनों से अमेरिका को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।
अब फंडिंग बंद करेगा अमेरिका
इसके साथ यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं के लिए बाहर निकलने का मतलब कानून द्वारा अनुमत सीमा तक उन संस्थाओं में भागीदारी या फंडिंग बंद करना होगा।
इसमें कहा गया है कि ट्रंप का यह फैसला विदेश मंत्री की रिपोर्ट पर विचार करने और अपने कैबिनेट के साथ चर्चा करने के बाद आया है, जिसमें उन्होंने तय किया कि संगठनों में भागीदारी या समर्थन अमेरिका के हितों के खिलाफ था।
पिछले साल यूनेस्को से बाहर निकल गया था अमेरिका
यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा जनवरी 2025 में COVID-19 महामारी के कुप्रबंधन का हवाला देते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर निकलने की घोषणा के लगभग एक साल बाद उठाया गया है। अमेरिका जुलाई 2025 में UNESCO से भी बाहर निकल गया था, यह कहते हुए कि यह अमेरिका के राष्ट्रीय हित में नहीं था।
ट्रंप ने डिफेंस कंपनियों के पेमेंट पर रोक लगाई
उधर, लंबे समय से चले आ रहे नियमों को तोड़ते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर कंपनियों को तब तक डिविडेंड देने या शेयर वापस खरीदने से रोका जाना चाहिए, जब तक वे हथियारों का प्रोडक्शन तेजी से नहीं बढ़ातीं।
ट्रंप ने एग्जीक्यूटिव की सैलरी को भी बहुत ज्यादा बताया और 5 मिलियन डॉलर की सैलरी कैप का प्रस्ताव दिया। साथ ही कंपनियों से नए और आधुनिक प्रोडक्शन प्लांट में निवेश करने का आग्रह किया।
हालांकि, यह नहीं बताया गया कि प्रस्तावित पाबंदियों को कैसे लागू किया जाएगा, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। ट्रंप का ये बयान F-35 फाइटर जेट जैसे प्रोजेक्ट में देरी और बजट से ज्यादा सेंटिनल मिसाइल प्रोग्राम को लेकर बढ़ती आलोचनाओं के बीच आया है।
