कठुवा, संवाददाता : आय में इजाफे के लिए शुरू की गई स्ट्राबेरी की खेती अब कठुआ के किसानों को भा गई है। पिछले वर्ष 180 कनाल भूमि पर की गई स्ट्राबेरी की खेती के रकबे को इस साल किसानों ने बढ़ाकर 240 कनाल कर दी है। इस पर बारीक नजर रख रहे जिला बागवानी विभाग का अनुमान है कि इस साल जिले में दो हजार क्विंटल रिकॉर्ड स्ट्राबेरी का उत्पादन होगा जो पिछले वर्ष की तुलना में आठ सौ क्विंटल अधिक है।
15 वर्ष पहले बागवानी विभाग ने किसानों को स्ट्राबेरी के उत्पादन के लिए प्रेरित करना शुरू किया था। विभाग की यह मुहिम अब जिले में जोर पकड़ चुकी है। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति कनाल 13 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी विभाग की ओर से प्रदान की जा रही है। साथ ही विशेषज्ञ टीम लगातार फील्ड विजिट कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दे रही है।
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार मध्य अक्तूबर में रोपाई के दो माह बाद दिसंबर से फल की तुड़ाई शुरू
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार मध्य अक्तूबर में रोपाई के दो माह बाद दिसंबर से फल की तुड़ाई शुरू हो जाती है। हर तुड़ाई में 50 से 60 किलो तक फल निकलता है जो बाजार में 600 रुपये से 800 रुपये प्रति किलो तक आसानी से बिक रही है। ऐसे में किसानों के सामने पैकेजिंग और विपणन में कोई बड़ी समस्या नहीं आ रही है। जिले में बागवानी विभाग ने प्रसंस्करण इकाई भी स्थापित की है। यहां किसान स्ट्राबेरी से जैम और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच सकते हैं। इससे उनकी आय का ग्राफ और अधिक बढ़ने की संभावना है।
गौरतलब हो कि पहले जिले के किसान पारंपरिक धान उत्पादन तक सीमित थे लेकिन विभाग की कोशिशाें और लीक से हटकर किसानों ने स्ट्राबेरी की खेती को अपनाया। अब यह न केवल किसानों को अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध करा रही है बल्कि जिले को एक नई पहचान भी दिला रही है।
यही वजह है कि पिछले वर्ष जिले में 180 कनाल में स्ट्राबेरी की खेती कर किसानों ने 12 सौ क्विंटल तक उत्पादन किया था। फायदे को देखते हुए किसानों ने इस वर्ष स्ट्राबेरी की खेती का रकबा बढ़ाकर 240 कनाल कर दिया है। जिला बागवानी विभाग के अनुसार इस साल करीब 2000 क्विंटल स्ट्राबेरी उत्पादन का अनुमान है जो अब तक का रिकॉर्ड होगा।
स्ट्राबेरी की खेती को कैश क्रॉप के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है और आने वाले वर्षों में जिले को जम्मू-कश्मीर में स्ट्राबेरी उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है। – अश्विनी शर्मा, जिला बागवानी अधिकारी
