अंबिकापुर, संवाददाता : स्वतंत्रता दिवस के पहले अंबिकापुर केंद्रीय जेल में 14-15 साल से बंद दरवाजे आज उम्मीद के लिए खुल गए। जेल नियमावली के तहत अच्छे आचरण और समीक्षा बोर्ड की सिफारिश पर आठ कैदियों को समय से पूर्व रिहा कर दिया गया। ये सभी आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। लोहे के गेट के बाहर कदम रखते ही कई कैदियों की आंखें भर आईं। किसी ने आसमान की ओर देखा, किसी ने मिट्टी को छुआ। 14-15 साल बाद खुली हवा, अपनों का स्पर्श… ये पल शब्दों से परे थे रिहाई की प्रक्रिया और सुधरे आचरण की महत्ता जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने बताया कि रिहाई की प्रक्रिया कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त रिपोर्ट के बाद शुरू होती है। रिपोर्ट महानिदेशक जेल को भेजी जाती है। वहां रिव्यू बोर्ड बैठक कर तय करता है कि किन बंदियों का आचरण सुधरा है और वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। जाने-अनजाने हुई भूल का प्रायश्चित किया’ रिहा हुए ओम प्रकाश धनकी ने जेल गेट से बाहर आकर कहा, “जाने-अनजाने में हमसे भूल हुई थी। उस भूल का प्रायश्चित इन सालों में कर लिया। जेल ने हमें अनुशासन सिखाया। अब बाहर जाकर परिवार के साथ रहेंगे और समाज में अच्छाई के लिए काम करेंगे।” उनकी बात सुनकर पास खड़े स्वजन और दूसरे लोग भी भावुक हो गए। अनुशासन और कौशल से मिली नई उम्मीद केंद्रीय जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने कहा कि जेल में रहकर नियमों का पालन करने, अच्छे आचरण और कौशल सीखने से ही यह अवसर मिलता है। “मैं उम्मीद करता हूं कि अन्य बंदी भी अनुशासन रखेंगे ताकि उन्हें भी समय से पूर्व रिहाई का लाभ मिले।” उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भी आठ और कैदियों को रिहा किया जाएगा। खाली हाथ नहीं, हुनर के साथ लौटे जेल प्रशासन ने इस बार कैदियों को सिर्फ रिहाई ही नहीं, बल्कि सम्मान के साथ नई शुरुआत का जरिया भी दिया। जेल में अपने कार्यों से जो पारिश्रमिक उन्होंने अर्जित किया था, वह उन्हें लौटा दिया गया। जिनके बैंक खाते थे, उनके खातों में ऑनलाइन राशि ट्रांसफर की गई। एक कैदी का खाता नहीं था तो उसे चेक के माध्यम से भुगतान किया गया। सबसे खास बात यह रही कि इनमें से दो कैदी जेल की उद्योग शाखा में लगातार काम कर रहे थे। एक को सिलाई का प्रमाण पत्र और दूसरे को काष्ठ कला का प्रमाण पत्र देकर विदा किया गया। जेल अधीक्षक ने कहा, “ये प्रमाण पत्र अब उनकी पहचान बनेंगे। इसके सहारे वे कहीं भी रोजगार पा सकते हैं। स्व-रोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।” एक परिवार, एक साथ आजाद इस बार की रिहाई सबसे ज्यादा भावुक एक परिवार के लिए रही। हत्या के एक ही मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक परिवार के तीन सदस्य आज एक साथ रिहा हुए। परिवार के अन्य तीन सदस्य पहले ही रिहा हो चुके थे। इनके चाचा की हत्या हुई थी। भावावेश में हत्या के कथित आरोपित भी भीड़ की पिटाई के शिकार हुए थे, इसमें एक की जान चली गई थी और परिवार के छह सदस्य नामजद हुए थे। आज जब तीनों एक साथ जेल से बाहर आए तो स्वजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 14 साल बाद पूरा परिवार एक छत के नीचे होगा, यही उनके लिए सबसे बड़ा स्वतंत्रता दिवस था। Post navigation DIOS दफ्तर में करोड़ों के घोटाले का आरोपी लिपिक बर्खास्त, 3 पत्नियों के खातों में भेजी थी रकम ओंकरेश्ववर रेलवे स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम का काम पूर्ण