नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क :अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या या सामूहिक फांसी से बाज आये। उन्होंने ईरान को वार्ता की मेज पर आने को कहा और चेताया कि अगला हमला पहले से कहीं अधिक कठोर हो सकता है।
ईरान पर हमले के लिए बस अब अंतिम बैठक में मुहर लगने ही वाली है, क्योंकि ईरान के दो बड़े दुश्मन ट्रंप और नेतन्याहू युद्ध की रणनीति बनाने के लिए एक साथ बैठ गये हैं। राजधानी वाशिंगटन में हो रही इस मुलाकात ने पश्चिम एशिया की सियासत को उबाल पर ला दिया है। एक ओर परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही खींचतान है, दूसरी ओर ईरान के भीतर दमन और खून खराबे के आरोप हैं, जिनसे हालात और भड़क उठे हैं। ऐसे समय में जब कूटनीति और टकराव के बीच की रेखा पतली होती जा रही है, यह बैठक आने वाले दिनों की दिशा तय कर सकती है।
ईरानी सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वह सरकार विरोधी घायल प्रदर्शनकारियों को अस्पतालों के भीतर तक खोज कर मार रहे हैं
हम आपको यह भी बता दें कि ईरानी सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वह सरकार विरोधी घायल प्रदर्शनकारियों को अस्पतालों के भीतर तक खोज कर मार रहे हैं। कई गवाहों के अनुसार अधिकारी अस्पतालों में घुस कर घायल लोगों की पहचान करते हैं और कुछ को सिर में नजदीक से गोली मार देते हैं। कहा गया कि कुछ लोग बिस्तर पर लेटे थे, उनके शरीर में दवा की नलियां और सांस लेने की नलियां लगी थीं, फिर भी उन्हें गोली मारी गयी। कुछ सूत्रों का दावा है कि ऐसे हत्याकांड लगभग हर दिन हो रहे हैं।
हिरासत में लिये गये लोगों के साथ यौन उत्पीड़न के भी आरोप हैं। बताया गया कि हालात इतने खराब हैं कि कुछ बंदी लड़कियों ने अपने घर वालों से गर्भ निरोधक गोलियां भेजने की गुहार लगायी। यह सब उस व्यापक दमन की पृष्ठभूमि में हो रहा है जो पहले आर्थिक तंगी और रियाल मुद्रा के गिरने से शुरु हुआ और बाद में देश भर में सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया। कार्यकर्ता समूहों का कहना है कि अशांति में हजारों लोग मारे जा चुके हैं।
एक मानव अधिकार समाचार संस्था के अनुसार कम से कम 6221 लोगों की जान गयी, जिनमें प्रदर्शनकारी, सुरक्षा बलों के सदस्य और आम नागरिक शामिल हैं, साथ ही 42000 से अधिक लोगों को पकड़ा गया। दूसरी ओर ईरानी अधिकारी कुल मौत का आंकड़ा 3117 बताते हैं और कई मृतकों को आतंकी करार देते हैं। स्वतंत्र जांच लगभग असंभव बतायी जा रही है क्योंकि देश में इंटरनेट पर कड़ी पाबंदी है।
चश्मदीदों ने पहले बताया था कि सुरक्षा बल पीछे से गोली चलाते हैं और अचानक जांच कर उन लोगों को पकड़ते हैं
चश्मदीदों ने पहले बताया था कि सुरक्षा बल पीछे से गोली चलाते हैं और अचानक जांच कर उन लोगों को पकड़ते हैं जिनके शरीर पर प्रदर्शन से जुड़ी चोट के निशान मिलते हैं। कई घायल लोग अस्पताल जाने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें पकड़े जाने या पूछताछ का भय रहता है। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठनों ने भी आरोप लगाया है कि बलों ने सीधे सिर और धड़ पर धातु छर्रे दागे।
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या या सामूहिक फांसी से बाज आये। उन्होंने ईरान को वार्ता की मेज पर आने को कहा और चेताया कि अगला हमला पहले से कहीं अधिक कठोर हो सकता है। वहीं, क्षेत्रीय ताकतें जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और कतर तनाव घटाने के लिए कूटनीतिक कोशिशों में लगे हैं।
इन सबके बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वाशिंगटन पहुंचे हैं। व्हाइट हाउस में ट्रंप से उनकी मुलाकात का मुख्य मुद्दा ईरान ही है। मुलाकात से पहले उन्होंने ट्रंप के करीबी सलाहकारों से भी चर्चा की। नेतन्याहू ट्रंप पर दबाव डालना चाहते हैं कि परमाणु वार्ता में कड़ा रुख अपनाया जाये। दरअसल इजराइल को शक है कि अमेरिका और ईरान की वार्ता सफल हो सकती है, इसलिए वह अपने हित सुरक्षित करने और किसी भी समझौते के बाद भी सैन्य कदम उठाने की छूट बचाये रखना चाहता है।
ट्रंप ने संकेत दिये हैं कि वह क्षेत्र में दूसरा विमान वाहक जलपोत प्रहार दल भेजने पर विचार कर रहे हैं
उधर, ट्रंप ने संकेत दिये हैं कि वह क्षेत्र में दूसरा विमान वाहक जलपोत प्रहार दल भेजने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि या तो अच्छा समझौता होगा या फिर बहुत कठोर कदम उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार और दूर तक मार करने वाली मिसाइल नहीं होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि ईरान के नेता समझौता चाहते हैं, पर वह सही शर्तों पर ही होना चाहिए।
वहीं नेतन्याहू यह भी कह चुके हैं कि वह ईरान की सैन्य क्षमता पर ताजा गुप्त जानकारी ट्रंप के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की शांति और सुरक्षा का सवाल है। वार्ता के दौरान हालांकि गाजा और अन्य क्षेत्रीय मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं, पर ईरान सबसे ऊपर है।
चश्मदीदों ने पहले बताया था कि सुरक्षा बल पीछे से गोली चलाते हैं और अचानक जांच कर उन लोगों को पकड़ते हैं जिनके शरीर पर प्रदर्शन से जुड़ी चोट के निशान मिलते हैं। कई घायल लोग अस्पताल जाने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें पकड़े जाने या पूछताछ का भय रहता है। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठनों ने भी आरोप लगाया है कि बलों ने सीधे सिर और धड़ पर धातु छर्रे दागे।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या या सामूहिक फांसी से बाज आये
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या या सामूहिक फांसी से बाज आये। उन्होंने ईरान को वार्ता की मेज पर आने को कहा और चेताया कि अगला हमला पहले से कहीं अधिक कठोर हो सकता है। वहीं, क्षेत्रीय ताकतें जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और कतर तनाव घटाने के लिए कूटनीतिक कोशिशों में लगे हैं।
इन सबके बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वाशिंगटन पहुंचे हैं। व्हाइट हाउस में ट्रंप से उनकी मुलाकात का मुख्य मुद्दा ईरान ही है। मुलाकात से पहले उन्होंने ट्रंप के करीबी सलाहकारों से भी चर्चा की। नेतन्याहू ट्रंप पर दबाव डालना चाहते हैं कि परमाणु वार्ता में कड़ा रुख अपनाया जाये। दरअसल इजराइल को शक है कि अमेरिका और ईरान की वार्ता सफल हो सकती है, इसलिए वह अपने हित सुरक्षित करने और किसी भी समझौते के बाद भी सैन्य कदम उठाने की छूट बचाये रखना चाहता है।
उधर, ट्रंप ने संकेत दिये हैं कि वह क्षेत्र में दूसरा विमान वाहक जलपोत प्रहार दल भेजने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि या तो अच्छा समझौता होगा या फिर बहुत कठोर कदम उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार और दूर तक मार करने वाली मिसाइल नहीं होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि ईरान के नेता समझौता चाहते हैं, पर वह सही शर्तों पर ही होना चाहिए। वहीं नेतन्याहू यह भी कह चुके हैं कि वह ईरान की सैन्य क्षमता पर ताजा गुप्त जानकारी ट्रंप के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की शांति और सुरक्षा का सवाल है। वार्ता के दौरान हालांकि गाजा और अन्य क्षेत्रीय मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं, पर ईरान सबसे ऊपर है।
