नई दिल्ली, वर्ल्ड डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लिए अब एक नया दांव खेला है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड का समर्थन कर रहे यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ऐसे में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्रमर और नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वेन वील ने यूरोपीय देशों के साथ एकजुटता दिखाई है।
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “ग्रीनलैंड पर हमारी राय बहुत साफ है; यह डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और इसका भविष्य ग्रीन लैंडर्स और डेनमार्क का मामला है। हमने यह भी साफ कर दिया है कि आर्कटिक सिक्योरिटी पूरे नाटो के लिए मायने रखती है और सहयोगी देशों को आर्कटिक के अलग-अलग हिस्सों में रूस से खतरे से निपटने के लिए मिलकर और ज्यादा काम करना चाहिए। नाटो सहयोगियों की सुरक्षा के लिए टैरिफ लगाना पूरी तरह से गलत है। हम बेशक इस मामले को सीधे अमेरिकी सरकार के सामने उठाएंगे।”
ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास का मकसद आर्कटिक इलाके में सुरक्षा में मदद करना
वहीं नीदरलैंड के विदेश मंत्री वील ने लिखा, “टैरिफ पर राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा पर ध्यान दिया गया है। ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास का मकसद आर्कटिक इलाके में सुरक्षा में मदद करना है। नीदरलैंड्स अपने जवाब के बारे में ईयू कमीशन और साझेदारों के साथ करीबी संपर्क में है।”
ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाया, डेनमार्क से लौटाने का दावा, ग्रीनलैंड सुरक्षा और चीन-रूस की महत्वाकांक्षा पर जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 27 में से आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “हमने डेनमार्क, और यूरोपियन यूनियन के सभी देशों, और दूसरों को कई सालों तक सब्सिडी दी है, उनसे टैरिफ या किसी और तरह का मेहनताना नहीं लिया। अब, सदियों बाद, डेनमार्क के लिए वापस देने का समय आ गया है, दुनिया की शांति दांव पर है! चीन और रूस ग्रीनलैंड चाहते हैं, और डेनमार्क इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता। उनके पास अभी सुरक्षा के लिए दो डॉगस्लेड हैं, जिनमें से एक हाल ही में जोड़ा गया है।”
उन्होंने आगे लिखा, “सिर्फ अमेरिका, राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में इस खेल में खेल सकता है, और वह भी बहुत कामयाबी से! कोई भी इस पवित्र जमीन को नहीं छूएगा, खासकर जब अमेरिका और पूरी दुनिया की राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर लगी हो। इन सबके अलावा, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड ने ग्रीनलैंड की यात्रा की है, जिसका मकसद पता नहीं है।”
