वाशिंगटन, रॉयटर : राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की नीतियों के खिलाफ पूरे अमेरिका में हजारों रैलियां का आयोजन किया गया हैं। इन रैलियों में नारे लगाते हुए हजारों लोगों ने भाग लिया। आयोजकों का कहना है कि सभी 50 राज्यों में 3,200 से अधिक विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम तय हैं। उम्मीद है कि यह अमेरिका के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा एक ही दिन में होने वाला अहिंसक विरोध प्रदर्शन होगा। इससे पहले हुए दो ”नो किंग्स” कार्यक्रमों में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया था। न्यूयॉर्क, लॉस एंजलिस और वाशिंगटन में बड़े विरोध प्रदर्शन न्यूयॉर्क, लॉस एंजलिस और वाशिंगटन में बड़े विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन आयोजकों के अनुसार, दो-तिहाई कार्यक्रम प्रमुख शहरों के केंद्रों के बाहर हो रहे हैं, जो पिछले जून में आंदोलन की पहली सक्रियता की तुलना में छोटे समुदायों में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वाशिंगटन के नेशनल माल में, भीड़ ने लोकतंत्र के समर्थन में नारे लगाए और ट्रंप के खिलाफ संकेत उठाए। मैरीलैंड के चेवी चेज में एक बहुमंजिला सहायक जीवन केंद्र के बाहर, व्हीलचेयर में बैठे बुजुर्गों के एक समूह ने गुजरते वाहनों को ”तानाशाही का विरोध करें,” ”यदि आप लोकतंत्र चाहते हैं तो हान्क करें” और ”ट्रंप को हटाएं” जैसे संकेत दिखाए। टेक्सास के ऑस्टिन में, एक ब्रास बैंड ने प्रदर्शनकारियों के इकट्ठा होने के दौरान संगीत प्रदान किया, जो सिटी हाल के बाहर एक मार्च के लिए इकट्ठा हुए। ‘इंडिविजिबल’ की सह-संस्थापक लेह ग्रीनबर्ग ने कहा कि इन रैलियों की सबसे खास बात यह नहीं है कि कितने लोग विरोध करेंगे, बल्कि यह है कि वे कहां विरोध करेंगे। ‘इंडिविजिबल’ ही वह समूह है, जिसने पिछले साल ‘नो किंग्स’ आंदोलन की शुरुआत की थी और सप्ताहांत की रैलियों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इस साल के आखिर में अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए आयोजकों का कहना है कि उन्होंने इडाहो, व्योमिंग, मोंटाना और यूटा जैसे पक्के रिपब्लिकन राज्यों में रैलियां आयोजित करने और उनमें हिस्सा लेने के लिए रजिस्टर करने वाले लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी है। हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन रैलियों को ”ट्रंप डेरेन्जमेंट थेरेपी सेशंस” कहकर खारिज कर दिया और कहा कि इनमें सिर्फ पत्रकारों की ही दिलचस्पी है। Post navigation US-Israel का तेहरान पर भीषण हवाई हमला, हूती विद्रोही भी जंग में कूदे पद्मभूषण विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की उम्र में निधन