संभल, संवाददाता : कुछ समय से विवादों की खबर-आने वाले इस जिले से एक सुखद खबर भी आई है। जिले के ग्रामीण इलाकों में खेती के तौर-तरीकों में बदलाव साफ नजर आने लगा है और जागरूक किसान अब पारंपरिक फसलों की जगह नकदी और बागवानी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में स्थायी बढ़ोतरी हो रही है। धनारी क्षेत्र के गांव कल्हा में एक किसान ने इस बदलाव को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है बल्कि अन्य किसानों के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
धनारी क्षेत्र के कल्हा गांव निवासी किसान विजयपाल यादव ने वर्ष 2019 में अपने गांव के ही निकट लगभग डेढ़ बीघा भूमि पर नींबू की बागवानी शुरू की थी। उस समय पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी मिलने के कारण उन्होंने नई फसल अपनाने का निर्णय लिया। शुरुआती वर्षों में पौधों की देखभाल, सिंचाई और खाद पर ध्यान दिया गया और वर्ष 2022 में बड़ी मात्रा में नींबू आने शुरू हो गए।
हर वर्ष 35 क्विंटल से अधिक नींबू की पैदावार
वर्तमान में मौसमी तौर पर नींबू का उत्पादन होता है और हर वर्ष 35 क्विंटल से अधिक नींबू की पैदावार हो रही है। इस उत्पादन को विजयपाल यादव स्थानीय मंडी में ही आपूर्ति कर देते हैं, जिससे उन्हें डेढ़ बीघा भूमि से प्रतिवर्ष करीब एक लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जबकि इतनी भूमि से गेहूं या अन्य पारंपरिक फसलों में यह आमदनी संभव नहीं हो पाती थी।
नींबू की खेती में लागत कम होने, मेहनत अपेक्षाकृत कम लगने और बाजार में मांग बने रहने से यह खेती उनके लिए फायदे का सौदा साबित हुई है और अब आसपास के किसान भी इस बागवानी को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
सही जानकारी, धैर्य और बाजार की मांग को समझकर की गई बागवानी किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया है और यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को जोड़ें तो कम जमीन में भी बेहतर और स्थायी आमदनी हासिल की जा सकती है। -विजयपाल यादव, किसान।
