बिलासपुर, संवाददाता : उसलापुर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्री ट्रेन पकड़ने से पहले बैठने का इंतजाम भी कर लें। यहां प्लेटफार्म दो पर ट्रेन का इंतजार करने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं हैं। ऐसे में खाली कुर्सी नहीं मिलने पर यात्रियों को अपने बैग को ही आसन बनाना पड़ रहा है। कई यात्रियों को मजबूरी में फर्श पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ रहा है। परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी और बढ़ जाती है। शहर के दूसरे प्रमुख रेलवे स्टेशन की यह तस्वीर रेलवे की यात्री सुविधाओं के दावों पर सवाल खड़े करती है। उसलापुर रेलवे स्टेशन शहर का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन है। इसकी उपयोगिता बढ़ाने रेल प्रशासन ने रायपुर व दुर्ग से आने वाली ट्रेनों का ठहराव बिलासपुर में बंद कर, उसलापुर में शुरू कर दिया है। इसी वजह से यात्रियों की संख्या भी पहले की तुलना में दोगुना हो गई है। यात्रियों की संख्या के अनुरूप इस स्टेशन में सुविधाओं की कमी अब यात्रियों को परेशान कर रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। यहां अप और डाउन दिशा मिलाकर प्रतिदिन 24 ट्रेनों का ठहराव है। इन ट्रेनों से यात्रा करने के लिए अलग-अलग समय पर यात्रियों की भीड़ प्लेटफार्म पर पहुंचती है। किसी को गंतव्य तक जाने वाली ट्रेन का इंतजार रहता है तो कोई रायपुर की ओर से आने वाले स्वजन को लेने पहुंचता है ज्यादतर ट्रेनें प्लेटफार्म दो पर ही ठहरती है। किसी को गंतव्य तक जाने वाली ट्रेन का इंतजार रहता है तो कोई रायपुर की ओर से आने वाले स्वजन को लेने पहुंचता है। लेकिन स्टेशन पर पहुंचने के बाद इस प्लेटफार्म पर सबसे पहली समस्या बैठने के लिए जगह तलाशने की होती है। प्लेटफार्म पर उपलब्ध कुर्सियां यात्रियों की संख्या के लिहाज से कम पड़ रही हैं। नतीजतन खाली जगह तलाशते यात्री इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। मंगलवार को भी इसी तरह का नजारा देखने को मिला। प्लेटफार्म दो पर दुर्ग- उधमपुर एक्सप्रेस पहुंचने वाली थी। इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों से प्लेटफार्म खचाखच था। स्थिति यह रही कि जिन यात्रियों को कुर्सी मिल गई, वे राहत महसूस करते रहे, जबकि आधे यात्रियों को खड़े रहकर या फर्श पर बैठकर समय बिताना पड़ता है। ज्यादातर यात्री अपने साथ रखे बैग को ही बैठने के लिए इस्तेमाल करते दिखे। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह परेशानी और भी असहज करने वाली है। ट्रेन निर्धारित समय से विलंब थी, इसलिए प्लेटफार्म पर अधिक समय तक बैठना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार यात्रियों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार यात्रियों को होती है। उनके लिए लंबे समय तक खड़े रहना आसान नहीं होता। परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों को बच्चों को संभालने के साथ बैठने की जगह भी तलाशनी पड़ी। सामान अधिक होने पर परेशानी दोगुनी हो जाती है। कई बार एक यात्री को बैठाने के लिए दूसरे सदस्य को खड़े रहना पड़ता है। रेल प्रशासन यात्रियों की इस समस्या से वाकिफ है। बावजूद इसके लिए उन्होंने इसे दूर करने का प्रयास नहीं किया। 300 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था, इतने की और आवश्यकता उसलापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर 12 व चार सीटर कुर्सियों को मिलाकर 300 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि इतने ही यात्रियों के बैठने के लिए कुर्सियों की आवश्यकता है। स्टेशन प्रबंधन की ओर से कई बार इस कमी को दूर करने का प्रस्ताव भेजा गया। पर अब तक व्यवस्था नहीं हुई। 12 से अधिक ट्रेनों का ठहराव उसलापुर स्टेशन का यह प्लेटफार्म लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। बिलासपुर, रायपुर व दुर्ग से प्रतिदिन छूटने वाली 12 ट्रेनों का ठहराव यहां रहता है। साप्ताहिक ट्रेनों को शामिल करेंगे तो संख्या 15 से अधिक है। जिनमें बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस, बिलासपुर- भाेपाल एक्सप्रेस, बिलासपुर- चिरमिरी एक्सप्रेस, दुर्ग- छपरा सारनाथ एक्सप्रेस, दुर्ग- नवनतवा एक्सप्रेस, दुर्ग-अंबिकापुर एक्सप्रेस, गोंदिया- बरौनी एक्सप्रेस, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, दुर्ग- उधमपुर एक्सप्रेस, दुर्ग- निजामुद्दीन संपर्कक्रांति एक्सप्रेस, रायपुर- लखनऊ गरीब रथ एक्सप्रेस, दुर्ग- निजामुद्दीन हम सफर एक्सप्रेस शामिल है। महत्वपूर्ण प्लेटफार्म पर शौचालय नहीं उसलापुर के इस प्लेटफार्म की एक समस्या तो हैरान करनी वाली है। इसके कटनी छोर पर शौचालय की व्यवस्था ही नहीं है। यह समस्या तब से हैं, जब से स्टेशन अस्तित्व में आया है। 548 मीटर लंबे इस प्लेटफार्म पर यदि कोई यात्री खड़ा है तो शौचालय का उपयोग करना है तो उसे एक से दूसरे छोर पर जाना पड़ता है। अमृत भारत स्टेशन योजना के पहले फेज का काम हो चुका है। लेकिन, एक शौचालय निर्माण को योजना में शामिल ही नहीं किया गया। क्या कहते हैं यात्री फर्श पर बैठने के लिए यात्री विवश – नवीन कश्यप यात्री नवीन कश्यप का कहना है कि उसलापुर रेलवे स्टेशन पर बुजुर्गों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। ट्रेन आने में कभी-कभी दो से तीन घंटे तक लग जाते हैं। ऐसे में इतनी देर खड़े रहना काफी मुश्किल होता है। उसलापुर स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर कुर्सियां कम होने के कारण खाली जगह तलाशनी पड़ती है। कई बार मजबूरी में फर्श पर बैठना पड़ता है। रेलवे को यात्रियों की संख्या के हिसाब से बैठने की व्यवस्था बढ़ानी चाहिए। खासकर बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से पर्याप्त कुर्सियां होनी चाहिए, ताकि उन्हें ट्रेन के इंतजार में परेशानी न उठानी पड़े। Post navigation CG: ढाई घंटे की तलाश के बाद मां की गोद में लौटा 1 साल का मासूम