नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क : भारत में स्टील की मांग वित्त वर्ष 26 में करीब 8% की दर से बढ़ने की संभावना है। इस दौरान स्टील की मांग में 11–12 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) की वृद्धि हो सकती है। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। स्टील की कीमतों में नरमी और आपूर्ति में बढ़ोतरी आईसीआरए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्टील की कीमतों में नरमी और आपूर्ति में बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में स्टील उत्पादकों के सामने चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, “आने वाली कुछ तिमाहियां घरेलू स्टील उत्पादकों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं, क्योंकि इनपुट लागत स्थिर बनी हुई है और बाहरी माहौल कमजोर है।” वित्त वर्ष 2026-31 के दौरान 80-85 मिलियन टन क्षमता वृद्धि के लिए 45-50 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे स्टील क्षमता विस्तार के लिए होने वाला निवेश धीमा पड़ सकता है। वित्त वर्ष 2026-31 के दौरान 80-85 मिलियन टन क्षमता वृद्धि के लिए 45-50 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान लगाया गया है। घरेलू स्टील उद्योग ने पिछले तीन से चार तिमाहियों में रिकॉर्ड 15 मिलियन टन की क्षमता वृद्धि की है दर्ज आईसीआरए के मुताबिक, घरेलू स्टील उद्योग के लिए ऑपरेटिंग मार्जिन वित्त वर्ष 26 में 12.5% रहने का अनुमान है। आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (कॉर्पोरेट सेक्टर रेटिंग्स) गिरीशकुमार कदम ने बताया कि घरेलू स्टील उद्योग ने पिछले तीन से चार तिमाहियों में रिकॉर्ड 15 मिलियन टन की क्षमता वृद्धि दर्ज की है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक इसमें 5 मिलियन टन की और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “घरेलू हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) की कीमतें वर्तमान में आयात कीमतों से नीचे चल रही हैं, जो आपूर्ति पक्ष पर बने लगातार दबाव को दर्शाता है।” वित्त वर्ष 26 के लिए घरेलू एचआरसी की औसत कीमत 50,500 रुपए प्रति टन रहने की संभावना आईसीआरए ने बताया कि वित्त वर्ष 26 के लिए घरेलू एचआरसी की औसत कीमत 50,500 रुपए प्रति टन रहने की संभावना है। घरेलू एचआरसी की कीमतें अप्रैल 2025 में बढ़कर 52,850 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई थीं, लेकिन आपूर्ति में बढ़ोतरी के कारण 12% सेफगार्ड ड्यूटी (एसजीडी) लागू होने के बावजूद नवंबर 2025 तक ये गिरकर 46,000 रुपए प्रति टन रह गईं। सेफगार्ड ड्यूटी को जारी रखने की आवश्यकता पर भी जोर रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ में बढ़ते व्यापार अवरोध वैश्विक स्टील अधिशेष को भारत जैसे उच्च विकास वाले बाजारों की ओर मोड़ सकते हैं। ऐसे में सेफगार्ड ड्यूटी को जारी रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। Post navigation Desert Cyclone 2025 : भारत-यूएई संयुक्त सैन्य अभ्यास, सेना का दल रवाना PMMSY योजना से भारतीय मत्स्य उद्योग का उत्पादन 38% बढ़ा