युद्ध पर ट्रंप का ‘विराम’ और गिर गए तेल के दाम

trump-oil-prices

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : सोमवार को वैश्विक तेल बाजार में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में 7% से ज्यादा की गिरावट आई, लेकिन ईरान ने किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया। यह घटना मध्य पूर्व में जारी युद्ध के चौथे हफ्ते में आई, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित है।

ट्रंप का बातचीत का दावा

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में शत्रुता को पूरी तरह खत्म करने के लिए बहुत अच्छी और उपयोगी बातचीत हुई है। उन्होंने लिखा कि यह बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी।

ट्रंप ने अमेरिकी युद्ध विभाग को ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर किसी भी हमले को पांच दिनों के लिए टालने का निर्देश दिया है, बशर्ते बातचीत सफल हो। ट्रंप के इस बयान से बाजार में राहत की लहर दौड़ी और तेल की कीमतें तेजी से गिरीं।

तेल की कीमतों में तेज गिरावट

ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 7% से ज्यादा गिरकर लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि दिन में एक समय यह 13% तक नीचे चला गया था। पहले ब्रेंट 114 डॉलर से ऊपर पहुंच चुका था। अमेरिकी बेंचमार्क WTI 6.9% गिरकर 91.4 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि दिन की शुरुआत में यह 100 डॉलर के आसपास था।

फिर भी, ये कीमतें 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमले से पहले के स्तर से एक तिहाई से ज्यादा ऊंची बनी हुई हैं।

कोई बातचीत नहीं, सिर्फ कीमतें कम करने की कोशिश: ईरान

ईरानी विदेश मंत्रालय ने राज्य मीडिया के हवाले से ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। तेहरान ने इसे ऊर्जा कीमतें कम करने और समय खरीदने की चाल बताया। ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी कि अगर उसके पावर प्लांट्स पर हमला हुआ तो बिजली के बदले बिजली का जवाब दिया जाएगा।

IRGC ने कहा कि इजराइल के ऊर्जा ढांचे और अमेरिकी सैन्य अड्डों वाले देशों के पावर प्लांट्स भी निशाने पर होंगे।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने एक्स पर लिखा कि ट्रंप की धमकी पर अमल होने पर मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण ढांचे और तेल सुविधाएं वैध लक्ष्य बन जाएंगी।

50 सालों में होर्मुज बनीं भारी संकट

युद्ध के चौथे हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदिश से वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी 1970 के दशक के दोनों तेल संकटों (1973 और 1979) से ज्यादा है। उन्होंने इसे इतिहास का सबसे बड़ा आपूर्ति संकट बताया।

बिरोल ने ऑस्ट्रेलिया के नेशनल प्रेस क्लब में कहा कि रोजाना 11 मिलियन बैरल तेल की कमी हो रही है, जो 1970 के दशक के संकटों से ज्यादा है। प्राकृतिक गैस की कमी भी 2022 के रूस-यूक्रेन संकट से बदतर है। पेट्रोकेमिकल, उर्वरक, सल्फर और हीलियम जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों का व्यापार भी ठप है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है।

IEA सदस्य देशों ने 11 मार्च को रणनीतिक भंडार से रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई थी। बिरोल ने कहा कि जरूरत पड़ने पर और तेल जारी किया जा सकता है, लेकिन यह सिर्फ दर्द कम करने वाला उपाय है, स्थायी समाधान नहीं। ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को ईरानी तेल पर प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटा दिए, जिससे समुद्र में खड़े 140 मिलियन बैरल तेल की बिक्री संभव हुई। यह वैश्विक मांग बहुत छोटा हिस्सा है।

India’s cricketers will score 200 against New Zealand Designs of Mehendi for Karwa Chauth in 2024 Indian Women’s T20 World Cup Qualifiers Simple Fitness Advice for the Holidays Top 5 Business Schools in the World