ऋषिकेश , संवाददाता : तीर्थनगरी के बजरंग सेतु पर बने आकर्षक कांच वाले फुटपाथ (ग्लास वॉक) पर घूमने और चहलकदमी करने के लिए अब पर्यटकों को जेब ढीली करनी होगी। विभाग की ओर से तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार बड़े लोगों से प्रति दो घंटे 100 रुपये और छोटे बच्चों से 50 रुपये शुल्क लिए जाने का प्रस्ताव है। शुल्क व्यवस्था लागू करने के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बजरंग सेतु के कांच वाले फुटपाथों पर आवाजाही के लिए लोनिवि नरेंद्र नगर की ओर से मानक तय कर दिए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पर्यटक इस अनूठे अनुभव का आनंद ले सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि शुल्क निर्धारित करने का मुख्य उद्देश्य कांच वाले फुटपाथ की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अनावश्यक भीड़ पर नियंत्रण रखना और व्यवस्थाओं के संचालन का खर्च वहन करना है। पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए पुल पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था भी लागू की जाएगी। दिन और रात की दो शिफ्टों में सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे। प्रवेश द्वारों पर दो-दो, निकासी द्वारों पर एक-एक सुरक्षा कर्मी तैनात रहेगा। वहीं ग्लास फुटपाथ पर बने सेल्फी प्वाइंट पर भी सुरक्षा कर्मी मौजूद रहेंगे। रात्रि के समय पुल के दोनों सिरों पर चार-चार सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या दुर्घटना की आशंका न रहे। प्रति वर्ष 4 करोड़ आय का लक्ष्य लोनिवि ने बजरंग सेतु से प्रतिवर्ष 4 करोड़ का लक्ष्य रखा है। लोनिवि अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में राज्य में अन्य स्थानों पर भी कांच के फुटपाथ वाले पुल बनाए जाएंगे, जिससे राजस्व भी बढ़ेगा और पर्यटन भी। सितंबर-अक्तूबर में प्रधानमंत्री कर सकते हैं उद्घाटन बजरंग सेतु पुल का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। फरवरी माह से इस पुल पर लोगों की आवाजाही भी शुरू हो गई है। कई बार फुटपाथ के कांच टूट भी चुके हैं लेकिन अभी तक पुल का उद्घाटन नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि सितंबर-अक्तूबर में यहां प्रधानमंत्री का दौरा प्रस्तावित है, इसी दौरान प्रधानमंत्री के हाथों पुल का उद्घाटन करवाया जाएगा। बजरंग सेतु के कांच वाले फुटपाथ पर चहलकदमी के लिए एसओपी तैयार कर ली गई है। जल्द निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर इसे विधिवत लागू कर दिया जाएगा। – केएस नेगी, अधीक्षण अभियंता, लोनिवि Post navigation गिरिराजजी की परिक्रमा के लिए उमड़ा जन सैलाब, ड्रोन से की जा रही निगरानी