नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को संकेत दिया कि भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को विकसित करने के लिए साझेदारियों की भी तलाश कर रहा है, क्योंकि इसके लिए बहुत बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी।
सरकार ने दो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय त्रि-राष्ट्रीय कार्यक्रमों से संपर्क किया है और उनमें सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की है। उनकी ओर से जवाब का इंतजार है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत एक बहु-स्तरीय पारंपरिक मिसाइल बल विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इस बल में छोटी, मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल होंगी।
एएनआई नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में रक्षा सचिव ने बताया कि पांचवीं पीढ़ी का एडवांस्ड मीडियम कांबैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है और उम्मीद है कि टेंडर जारी होने के बाद इसमें और तेजी आएगी।
उन्होंने कहा, ”खरीद प्रक्रिया जारी है; उम्मीद है कि जल्द ही चुने गए बोलीदाताओं (जो निजी क्षेत्र से हैं) के लिए रिक्वेस्ट फार प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दी जाएगी और इसके बाद इस प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।”
एएमसीए और राफेल से जुड़े उत्पादन जैसे आगामी प्रमुख एयरोस्पेस प्रोजेक्ट्स में एचएएल की अनुपस्थिति को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर सिंह ने कहा, ”अमेरिका, रूस और चीन जैसे दुनिया के अधिकांश प्रमुख रक्षा उत्पादक देशों के पास दो अलग-अलग कंपनियों में लड़ाकू विमानों की दो उत्पादन लाइनें होती हैं। चीन में कभी-कभी ये दोनों ही सरकारी कंपनियां होती हैं, लेकिन उनके पास दो उत्पादन लाइनें जरूर होती हैं।”
रक्षा निर्यात में तेज रफ्तार
राजनाथ सिंह ने भरोसा जताया कि भारत 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को आसानी से पार कर लेगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भारत का रक्षा निर्यात करीब 38,000 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल में 61 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। देश पहले ही इस क्षेत्र में तेज विकास की राह पर है और वैश्विक मांग इसमें नई गति दे रही है।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में चल रहे संघर्षों के कारण पारंपरिक हथियारों- जैसे गोला-बारूद और तोप के गोलों- की मांग तेजी से बढ़ी है। उन्होंने संकेत दिया कि बदलते वैश्विक परि²श्य के बीच भारत को अपनी मिसाइल रणनीति पर भी पुनर्विचार करना होगा।
