नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : इजरायली संसद नेसेट ने सोमवार को एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके तहत 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में शामिल आरोपियों की सुनवाई के लिए विशेष ट्रिब्यूनल गठित किया जाएगा। यह ट्रिब्यूनल दोष सिद्ध होने पर मृत्युदंड सुनाने का अधिकार रखेगा।
120 सदस्यीय नेसेट में विधेयक 93-0 के मत से पारित हुआ। हालांकि, 27 सांसद मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे या उन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। विधेयक को इजरायल के इतिहास के सबसे भीषण हमले के दोषियों को दंडित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेष ट्रिब्यूनल विधेयक को मंजूरी
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1,200 इजरायली नागरिक मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें अब तक 72,628 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है। युद्धविराम लागू होने के बाद भी हिंसा जारी रही और अब तक 846 लोगों के मारे जाने की खबर है।
विधेयक के तहत न्यायाधीशों का पैनल बहुमत के आधार पर मृत्युदंड सुना सकेगा। दोषियों को अपील का अधिकार होगा, लेकिन उनकी अपील नियमित अदालतों के बजाय विशेष अपीलीय अदालत में सुनी जाएगी। साथ ही, यरूशलम में होने वाली सुनवाई का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।
मार्च में पारित कानून से यह विधेयक अलग
मार्च 2026 में इजरायल ने एक अलग कानून पारित किया था, जिसमें इजरायलियों की हत्या के दोषी फलस्तीनियों के लिए मृत्युदंड का प्रविधान किया गया था। उस कानून की अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने भेदभावपूर्ण और अमानवीय बताकर आलोचना की थी।
नया विधेयक उससे कई मायनों में अलग है
- मार्च का कानून भविष्य में होने वाले मामलों पर लागू होता है, जबकि नया विधेयक विशेष रूप से 7 अक्टूबर 2023 के हमले के आरोपियों की सुनवाई के लिए लाया गया है।
- पुराने कानून में सामान्य न्यायिक प्रक्रिया लागू होती थी, जबकि नए विधेयक में विशेष ट्रिब्यूनल और अलग अपीलीय अदालत का गठन किया जाएगा।
- नए विधेयक में मुकदमे की लाइवस्ट्री¨मग का प्रविधान भी है, जो मार्च के कानून में नहीं था।
- मार्च के कानून में मृत्युदंड संबंधी प्रविधान सामान्य आतंकवाद मामलों के लिए थे, जबकि नया कानून हमास हमले के आरोपियों पर केंद्रित है।
