कानपुर, संवाददाता : हजारों साल पहले मदद के लिए सुदामा ने कृष्ण के दरबार में गुहार लगाई थी। मंगलवार को जनता दर्शन के दौरान सुदामा को 29 वर्षों के संघर्ष के बाद डीएम की स्वीकृति पर जीपीएफ के तीन लाख रुपये मिल गए। बीते दो माह पहले कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह जनता दर्शन कर रहे थे। अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे लोगों की भीड़ से एक बुजुर्ग खड़े हुए। सफेद कुर्ता पायजामा, हाथ में पुरानी फाइल और थैला, चेहरे पर धैर्य और आंखों में उम्मीद लेकर सुदामा प्रसाद कलक्ट्रेट पहुंचे थे।
29 वर्षों में कई डीएम बदल गए लेकिन सुदामा की फाइल वहीं की वहीं अटकी रही। दरअसल, मामला सेवानिवृत्ति अभिलेखों में छूटे एक महत्वपूर्ण तथ्य के कारण अटका हुआ था। पारिवारिक न्यायालय बांदा ने सुदामा की पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था लेकिन 1995 में पत्नी का निधन होने के बाद यह जानकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं हो पाया था। इस कारण उन्हें जीपीएफ समेत अन्य भुगतान के लिए इतने वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।
मंगलवार को जनता दर्शन में उन्होंने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने अपनी व्यथा रखी तो उन्होंने पुरानी फाइलें मंगवाई और रिकॉर्ड खंगलवाया। डीएम के निर्देश पर बांदा से अभिलेख मंगाए गए। कोषाधिकारी ने रिपोर्ट दी कि खाते में जमा राशि पर चालू वित्तीय वर्ष तक ब्याज जोड़कर पूरा भुगतान होना बाकी है, कोई आंशिक भुगतान भी नहीं हुआ है। उप जिलाधिकारी सदर की जांच रिपोर्ट में ब्याज सहित 3.07 लाख रुपये देय पाए गए। तीन दशक की लंबी जद्दोजहद, धैर्य और उम्मीद के बाद सेवानिवृत्त संग्रह सेवक सुदामा प्रसाद को आखिरकार उनकी मेहनत की कमाई मिल गई।