इलाज के बहाने मतांतरण का खुलासा, 10 आदिवासी परिवारों की घर वापसी

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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : छत्तीसगढ़ के बस्तर के अंदरूनी गांवों में आदिवासियों को प्रार्थना कर गंभीर बीमारी ठीक करने व हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध भ्रम फैलाकर मिशनरी उनका मतांतरण करवा रहे हैं। इसको लेकर सिरहा-गुनिया व गायता-पेरमा वैद्यों (औषधि उपचार के जानकार) ने संगठन बनाया है। इसके सदस्य ग्रामीणों को मिशनरियों की साजिश को लेकर सजग कर रहे हैं।

संगठन के प्रयास से अब तक लगभग 10 परिवारों ने घर वापसी भी की है। फरसागुड़ा निवासी प्रेमसागर पंत के नेतृत्व में शुरू हुए इस प्रयास में 265 सदस्य जुड़ चुके हैं। पंत ने बताया कि मतांतरण के जवाब में अब गांव-गांव जाकर बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। उनके समूह ने सैकड़ों वर्षों से चली आ रही जनजातीय परंपराओं का बचाने के लिए लोगों को समझाना शुरू किया है।

उन्होंने बताया कि मिशनरी वाले प्रार्थना कर असाध्य रोगों को ठीक करने का दावा भी करते थे। संगठन ने कोंडागांव के मर्दापाल से लेकर बीजापुर के सुदूर गांवों तक संपर्क बनाया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे पादरियों के प्रवेश पर भी रोक लगाई जा रही है, जो आर्थिक प्रलोभन या चमत्कारी इलाज के नाम पर मतांतरण का प्रयास करते हैं।

बाक्समतांतरितों को आरक्षण लाभ से वंचित करने की मांग पर दिल्ली में करेंगे प्रदर्शन

मतांतरितों को आरक्षण से वंचित करने की मांग को लेकर जनजातीय समाज ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है। इसी संदर्भ में 22 मई 2026 को प्रस्तावित दिल्ली चलो आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए रविवार को जनजातीय सुरक्षा मंच की बैठक छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने की। बैठक के बाद भगत ने कहा कि दिल्ली चलो आंदोलन के लिए जनजातीय सुरक्षा मंच ने 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है।

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