गबन में सहायक लेखाधिकारी रिटायरमेंट के एक दिन पहले बर्खास्त

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गोरखपुर , संवाददाता : बागपत में वर्ष 2016-18 के बीच तैनाती के दौरान गबन का आरोप लगा। वर्तमान में गोरखपुर प्रथम खंड में तैनात था। बागपत में जांच में दोषी पाए जाने पर बर्खास्त हुआ था। कोर्ट से राहत मिलने पर दोबारा जांच का आदेश हुआ था।

गोरखपुर प्रथम खंड में तैनात सहायक लेखाधिकारी ईशपाल सिंह को उपभोक्ताओं की ओर से जमा किए गए बिजली बिल में गबन के आरोप में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी ने रिटायरमेंट के एक दिन पहले मंगलवार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। उसकी सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर को थी। इसके साथ ही ईशपाल सिंह पर 11,06,457 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

जानकारी के अनुसार, ईशपाल सिंह ने यह गबन 2016-2018 के बीच बागपत में सहायक लेखाधिकारी के पद पर तैनाती के दौरान किया था। इस दौरान उसने बागपत के बाबू सुरेश के साथ मिलकर ऑनलाइन बिलिंग में 1,69,52,473 रुपये की राशि का गबन किया। साथ ही 25 रसीद बुक भी वापस नहीं की गई। इस मामले की जांच मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने की और रिपोर्ट एमडी को सौंपी।

ईशपाल सिंह को 2023 में पहले भी बर्खास्त किया गया था

ईशपाल सिंह को 2023 में पहले भी बर्खास्त किया गया था लेकिन उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। वर्ष 2024 में कोर्ट से उसे राहत मिलते हुए निलंबित कर दोबारा जांच का आदेश दिया गया। इस दौरान उन्हें गोरखपुर प्रथम खंड में तैनात किया गया। मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि जांच रिपोर्ट में गबन के सभी प्रमाण मिल चुके थे और एमडी ने इसके आधार पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की।

बर्खास्त करने के साथ लगाया जुर्माना
एमडी के आदेश के अनुसार, ईशपाल सिंह को बर्खास्त करने के साथ ही गबन की गई राशि में से हिस्से का बंटवारा करते हुए 11,06,457 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि निगम अपने कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और वित्तीय गबन के मामलों में सख्त रवैया अपनाता है। दरअसल, ईशपाल सिंह की तैनाती 27 फरवरी 2016 से 29 मई 2018 तक बागपत में सहायक लेखाधिकारी के पद पर रही। उसकी बर्खास्तगी के आदेश में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में निगम की शून्य सहनशीलता है और किसी भी प्रकार के वित्तीय गबन पर नजर रखी जाएगी।

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट प्रमाण मिलने के बाद एमडी ने कार्रवाई की है। निगम का उद्देश्य है कि उपभोक्ताओं का विश्वास बनाए रखा जाए और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित हो। – आशुतोष श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता

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