Strait of Hormuz से टैंकर आने बंद, भारत ने खोजा शानदार ‘रास्ता’

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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : भारत की रिफाइनिंग कंपनियों ने अतिरिक्त कच्चे तेल की खरीद के लिए अमेरिका, रूस और पश्चिम अफ्रीका से बातचीत शुरू कर दी है ताकि पश्चिम एशिया संघर्ष लंबा खिंचने पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में परिवर्तित करने वाली रिफाइनरियों ने योजनाबद्ध रखरखाव बंदी को स्थगित कर दिया है और देश की निकट भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सामान्य प्रसंस्करण दर बनाए रखी है।

88 प्रतिशत तेल आयात करता है भारत

भारत अपने कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से फरवरी में लगभग आधी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से हुई है। हालिया सैन्य हमलों और प्रतिशोधी हमलों ने क्षेत्र में तनाव को बढ़ा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप रणनीतिक जलमार्ग के माध्यम से टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है।

तेल मंत्रालय से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि गैर-जलडमरूमध्य स्त्रोत पूरी तरह से कार्यशील हैं और हम संघर्ष क्षेत्रों के बाहर से अधिक से अधिक आपूर्ति प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2025 में गैर-जलडमरूमध्य स्त्रोतों ने आपूर्ति में 60 प्रतिशत योगदान दिया जो अब बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है।

30 दिन की मिली है छूट
भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से कच्चा तेल खरीद रही हैं। अमेरिका ने भारत को पहले से लदे रूसी तेल की बिक्री और डिलीवरी की अनुमति देने के लिए 30 दिन की छूट जारी की है।

यह छूट उन कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री, डिलीवरी या डिस्चार्ज की अनुमति देती है जो पांच मार्च या उससे पहले जहाजों पर लदे थे। अभी समुद्र में 12 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल फंसा है। उद्योग सूत्रों ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने इस रूसी तेल को खरीदना शुरू कर दिया है।


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