नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस दशक के अंत तक (2030 तक) भारत जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। इसके अलावा, भारत जल्द ही नामिनल जीडीपी के मामले में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा।
बीसीजी ने यह भी कहा कि देश के विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए कुछ ढांचागत चुनौतियों को हल करना होगा। बता दें कि नामिनल जीडीपी किसी देश की सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य है। इनकी गणना वर्तमान कीमतों पर की जाती है।
भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा
इसमें मुद्रास्फीति का समायोजन नहीं होता है, इसलिए यह वास्तविक आर्थिक विकास के साथ-साथ बढ़ती कीमतों का भी असर दिखाता है।रिपोर्ट में मैन्यूफैक्च¨रग में गिरावट को मुख्य ¨चता के तौर पर उजागर किया गया है और कहा गया है कि पिछले एक दशक में जीडीपी में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत रह गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी कंपनी में मैन्यूफैक्चरिंग का हर नया रोजगार पूरी अर्थव्यवस्था में दो से ज्यादा अतिरिक्त रोजगार पैदा करता है जबकि सेवा क्षेत्र में भर्ती का गुणक प्रभाव बहुत कम होता है और यह आमतौर पर सिर्फ एक अतिरिक्त रोजगार पैदा करता है।
रिपोर्ट में किन क्षेत्रों पर जोर
रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र में वितरण की अक्षमताओं को भी उजागर किया गया है। इस कमी के चलते किसानों को उनकी उपज के लिए उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की गई राशि का केवल 25 प्रतिशत ही मिल पाता है। इसके चलते भारत के समग्र आर्थिक विस्तार के बावजूद ग्रामीण आय में वृद्धि सीमित रहती है। रिपोर्ट में भारतीय कंपनियों से आग्रह किया गया है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को केवल एक प्रयोग के तौर पर नहीं देखें बल्कि इसे एक रणनीतिक अनिवार्यता के रूप में अपनाएं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘भारत का एक उच्च-आय वाली अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब शहरों को रहने लायक बनाने के लिए शहरी बुनियादी ढांचे, किफायती आवास और सार्वजनिक परिवहन में निवेश किया जाए, जिससे पूरी आबादी को इसका लाभ मिल सके।
एक दशक में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च पांच गुना बढ़ा
सरकार ने बुधवार को बताया कि भारत का सार्वजनिक पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2014-15 के दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.20 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
साथ ही, केंद्रीय बजट 2026-27 में इन्फ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड’ और ‘सिटी इकोनमिक रीजन्स’ जैसे नए उपाय पेश किए गए हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआई आइएफ) और नेशनल बैंक फार फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट जैसे संस्थानों ने वैश्विक और घरेलू पूंजी के रूप में अरबों रुपये जुटाए हैं, जिससे शासन और दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रवाह को मजबूती मिली है।
