मिडिल ईस्ट संकट पर CCS की बैठक,मोदी बोले- जनता पर नहीं पड़ने देंगे असर

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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति की समीक्षा की गई और भारत के राष्ट्रीय हितों पर इसके संभावित प्रभाव का आकलन किया गया।

28 फरवरी, 2026 को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के बाद से यह सीसीएस की दूसरी बैठक थी। इन हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य सहित पूरे क्षेत्र में व्यवधान उत्पन्न हुआ और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता आई।प्रेट्र के अनुसार, बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई और आम आदमी की जरूरतों की उपलब्धता का आकलन किया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि बैठक में मोदी ने नागरिकों को संघर्ष के प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने उर्वरकों की स्थिति और खरीफ तथा रबी सीजन में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का जायजा लिया। उन्होंने जनता को गलत सूचना और अफवाहों से बचाने के लिए प्रामाणिक जानकारी का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बुधवार शाम को हुई उच्च स्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे

बुधवार शाम को हुई उच्च स्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी बैठक में मौजूद थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित वरिष्ठ अधिकारी और कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन भी बैठक में शामिल हुए।

कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और विभिन्न मंत्रालयों द्वारा पहले से ही उठाए गए या विचाराधीन उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम आयात, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, कृषि, लघु एवं मध्यम अवधि के उपक्रमों (एमएसएमई), निर्यात, जहाजरानी, व्यापार, वित्त और आपूर्ति श्रृंखला सहित प्रमुख क्षेत्रों पर संकट के अल्पकालिक, मध्यम अवधि के और दीर्घकालिक प्रभावों पर चर्चा की गई। बैठक में मंत्रालयों द्वारा किए गए उपायों की समीक्षा की गई और आगे की पहलों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के प्रमुख फैसले और निर्देश

पेट्रोलियम उत्पादों की सुरक्षा: पेट्रोलियम उत्पादों, खासकर एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई। आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने का काम तेज किया जा रहा है।

एलपीजी कीमतें स्थिर: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें अपरिवर्तित रखने का फैसला लिया गया।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती: अवैध व्यापार और कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत किया जा रहा है।

ईंधन शुल्क और बिजली क्षेत्र: ईंधन शुल्क में कमी और बिजली उत्पादन से संबंधित उपायों की समीक्षा की गई। थर्मल पावर प्लांटों को अतिरिक्त कोयले की आपूर्ति और गैस आधारित बिजली उत्पादन के लिए मानदंडों में ढील देने जैसे कदमों पर चर्चा हुई।

कोयला भंडार पर्याप्त: अधिकारियों ने बताया कि आने वाले महीनों में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयले का भंडार उपलब्ध है।

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