आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन,यूआईडीएआई

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नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : सरकार ने सोमवार को बताया कि आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए अब तक कम से कम 100 संस्थाओं को ‘ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (ओवीएसई)’ के रूप में जोड़ा जा चुका है। यह उपलब्धि इस सिस्टम के लॉन्च के सिर्फ तीन महीनों के भीतर हासिल की गई है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा हासिल यह मील का पत्थर सुरक्षित, कागज रहित और यूजर की सहमति पर आधारित पहचान सत्यापन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इन संस्थाओं के जुड़ने से सेवाओं की डिलीवरी तेज होगी

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अनुसार, इन 100 संस्थाओं में केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, फिनटेक कंपनियां, होटल और इवेंट मैनेजमेंट फर्म, शिक्षा और परीक्षा से जुड़े संस्थान, तथा बैकग्राउंड और वर्कफोर्स वेरिफिकेशन से जुड़े संगठन शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन संस्थाओं के जुड़ने से सेवाओं की डिलीवरी तेज होगी, प्रोसेसिंग समय कम होगा और फिजिकल दस्तावेजों पर निर्भरता घटेगी।

यूजर अपने डेटा पर पूरा नियंत्रण रखता है

आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम में यूजर क्यूआर कोड या डिजिटल साइन किए गए डॉक्यूमेंट के जरिए अपनी सीमित और जरूरी जानकारी साझा कर सकते हैं। इससे यूजर अपने डेटा पर पूरा नियंत्रण रखता है और तय कर सकता है कि कौन-सी जानकारी किसके साथ साझा करनी है। सरकार का कहना है कि यह सिस्टम डेटा सुरक्षा और गोपनीयता (प्राइवेसी) को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ रहा है।

मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम

मंत्रालय के मुताबिक, यह व्यवस्था देश में मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम है, क्योंकि यह स्केलेबल और सुरक्षित सिस्टम प्रदान करती है। सरकार का मानना है कि इससे ‘ईज ऑफ लिविंग (जीवन की सुगमता)’ में सुधार होगा, क्योंकि लोगों को अब तेजी से सेवाएं मिलेंगी, कागजी काम कम होगा और रोजमर्रा के काम आसान होंगे।

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