नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क : India land acquisition growth : भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में 2025 के दौरान जमीन अधिग्रहण में सालाना आधार पर 32% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। JLL की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेवलपर्स ने 149 सौदों के जरिए 3,093 एकड़ जमीन खरीदी, जिसकी कुल वैल्यू 54,818 करोड़ रुपए रही।
डेवलपर्स का बढ़ता भरोसा और निर्माण की संभावनाएं
JLL की रिपोर्ट के अनुसार, खरीदी गई जमीन पर अगले 2 से 5 साल में करीब 229 मिलियन स्क्वायर फीट निर्माण संभव है। यह रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूत मांग और डेवलपर्स के भरोसे को दर्शाता है।
टियर-1 शहरों में निवेश का दबदबा
रिपोर्ट में निवेश के असंतुलन को भी रेखांकित किया गया है। टियर-1 शहरों में कुल निवेश का 89% हिस्सा गया, जबकि जमीन का हिस्सा केवल 52% रहा। इससे साफ है कि बड़े शहरों में जमीन महंगी है और निवेश ज्यादा केंद्रित है।
टियर-2 शहरों में ज्यादा जमीन, कम निवेश
इसके विपरीत, टियर-2 शहरों में 48% जमीन के सौदे हुए, लेकिन उन्हें सिर्फ 11% निवेश मिला। यह संकेत देता है कि इन शहरों में जमीन अपेक्षाकृत सस्ती है और भविष्य में विकास की संभावनाएं अधिक हैं।
2026 की शुरुआत में भी जारी रही तेजी
यह रफ्तार 2026 में भी बरकरार रही। पहली तिमाही में ही प्रमुख बाजारों में करीब 900 एकड़ जमीन खरीदी गई, जिसकी कीमत लगभग 18,000 करोड़ रुपए रही।
मुंबई महानगर क्षेत्र में सबसे बड़ा सौदा
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ा जमीन सौदा मुंबई महानगर क्षेत्र में हुआ, जहां 11 एकड़ जमीन 5,400 करोड़ रुपए में खरीदी गई।
निर्माण के लिए बड़े फंड की जरूरत
इन जमीनों पर प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए 92,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश की जरूरत होगी। इसमें बाहरी फंडिंग की हिस्सेदारी 52,000 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है, जिससे एआईएफ, प्राइवेट क्रेडिट कंपनियों और बड़े निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
टियर-1 प्रोजेक्ट्स में पूंजी की ज्यादा मांग
आने वाले प्रोजेक्ट्स में लगभग 89% पूंजी टियर-1 शहरों में ही लगेगी, क्योंकि इन क्षेत्रों में प्रीमियम रियल एस्टेट की मांग अधिक है और प्रोजेक्ट लागत भी ज्यादा होती है।
रिहायशी प्रोजेक्ट्स का दबदबा कायम
रिहायशी (रेजिडेंशियल) प्रोजेक्ट इस सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं। कुल जमीन का 78% हिस्सा इन्हीं के लिए इस्तेमाल हुआ और कुल फंडिंग का लगभग 76% भी इसी में लगा। इनकी निर्माण लागत 72,000 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है।
ऑफिस स्पेस की मांग बनी हुई
ऑफिस प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 8,700 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत का अनुमान है, जो ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की लगातार बनी मांग को दर्शाता है।
व्यक्तिगत विक्रेताओं का दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर जमीन व्यक्तिगत मालिकों ने बेची, जिनका कुल सौदों में 65% हिस्सा रहा।
शहरों के हिसाब से अलग रुझान
चेन्नई, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में व्यक्तिगत विक्रेता ज्यादा सक्रिय रहे, जबकि हैदराबाद में कॉरपोरेट कंपनियां आगे रहीं। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में अधिकतर सौदे सरकारी संस्थाओं द्वारा किए गए।
नए सेक्टर्स में भी बढ़ रही दिलचस्पी
डेवलपर्स अब पारंपरिक रियल एस्टेट से आगे बढ़कर डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और अन्य वैकल्पिक क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।
