नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : अमेरिका में हाल ही में गैस की कीमतों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है और अमेरिका के लोग इन कीमतों के बढ़ने की वजह राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को मान रहे हैं। इप्सोस द्वारा किए गए और रॉयटर्स द्वारा रिपोर्ट किए गए एक सर्वे के माध्यम से सामने आई है।
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले इस सर्वे की रिपोर्ट ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए नई राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार ट्रंप
सर्वे के अनुसार, 77% रजिस्टर्ड वोटरों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए ट्रंप कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। इन लोगों का मानना है कि ईरान के साथ युद्ध के बाद ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं।
यह राय किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है। इसमें 55% रिपब्लिकन, 82% निर्दलीय और 95% डेमोक्रेट राष्ट्रपति ट्रंप को दोषी मानते हैं।
इप्सोस ने यह पोल 15 से 20 अप्रैल के बीच 4,557 अमेरिकी वयस्कों के बीच किया था, जिसमें 3,577 रजिस्टर्ड वोटर शामिल थे। इस पोल में दो प्रतिशत अंकों की त्रुटि की गुंजाइश है।
अमेरिका के साथ दुनिया में बढ़ी तेल की कीमतें
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमला करने के साथ ही मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ गया। ईरान ने भी जवाबी हमले किए। मिडिल ईस्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे व्यस्त तेल सप्लाई के जलमार्ग में एक है। इस क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के साथ ही जलमार्ग में तेल की सप्लाई बाधित हो गई।
इस युद्ध का असर दुनियाभर के तेल व्यापार के लगभग पांचवें हिस्से पर पड़ा है। इसके चलते अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें बढ़कर लगभग 4 डॉलर प्रति गैलन हो गई हैं, जो कि युद्ध शुरू होने के पहले के स्तर से करीब एक डॉलर ज्यादा है।
सर्वे में करीब 58% लोगों ने कहा कि 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में वे उन उम्मीदवारों का समर्थन करने की संभावना कम रखते हैं, जो ईरान संघर्ष को संभालने के ट्रंप के तरीके का समर्थन करते हैं।
रिपब्लिकन मेन स्ट्रीट पार्टनरशिप की अध्यक्ष सारा चेम्बरलेन ने कहा, ‘अभी हालात खराब हैं। लोग परेशान हैं।’ ऐसे बयान रिपब्लिकन खेमे में चिंता बढ़ा रहे हैं।
