नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : ICMR conference : एकीकृत चिकित्सा नैदानिक परीक्षणों पर फोकस” विषय के तहत प्रथम आईसीएमआर वार्षिक क्लिनिकल ट्रायल बैठक 2026 का आयोजन किया। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में भारत के क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और साक्ष्य-आधारित एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई।
नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा
बैठक में नीति निर्माता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधकर्ता, नियामक प्राधिकरण और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम में वी.के. पॉल, राजीव बहल और राजेश कोटेचा सहित स्वास्थ्य और वैज्ञानिक समुदाय के कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत नैदानिक अनुसंधान प्रणाली, नैतिक शासन और एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं के वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता पर बल दिया।
एनीमिया पर बहुकेंद्रीय अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया पर आईसीएमआर-सीसीआरएएस के बहुकेंद्रीय चरण-3 रेंडोमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल (आरसीटी) के निष्कर्षों की प्रस्तुति रही। इस अध्ययन में पुनर्नवादि मंडुरा और द्राक्षवलेहा जैसी आयुर्वेदिक औषधियों की प्रभावशीलता की तुलना मानक आयरन-फोलिक एसिड उपचार से की गई। 18 से 49 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 4,000 गैर-गर्भवती महिलाओं पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि दोनों आयुर्वेदिक औषधियां चिकित्सीय रूप से मानक उपचार के बराबर प्रभावी थीं।
प्रथम-मानव चरण-1 परीक्षणों पर रिपोर्ट जारी
आईसीएमआर ने “भारत में प्रथम चरण के नैदानिक परीक्षणों को आगे बढ़ाना: नियामक प्रक्रियाओं और अवसरों पर एक डेल्फी अध्ययन” शीर्षक रिपोर्ट भी जारी की। यह रिपोर्ट फार्मास्युटिकल उद्योग, संविदा अनुसंधान संगठनों, शिक्षाविदों और राष्ट्रीय नियामक एजेंसियों के 37 विशेषज्ञों के साथ परामर्श के आधार पर तैयार की गई। रिपोर्ट में प्रारंभिक चरण के नैदानिक परीक्षणों में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की पहचान करते हुए नियामक क्षमता मजबूत करने, मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की सिफारिश की गई।
बहुकेंद्रीय अनुसंधान के लिए नैतिक समीक्षा दिशानिर्देश जारी
सम्मेलन के दौरान “भारत में बहुकेंद्रीय अनुसंधान की एकल नैतिक समीक्षा के लिए परिचालन दिशानिर्देश” भी जारी किए गए। इनका उद्देश्य देशभर में बहुकेंद्रीय अनुसंधान अध्ययनों के लिए नैतिक समीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुसंगत और मजबूत बनाना है।
नीतिगत स्वीकृति पर पैनल चर्चा
कार्यक्रम में “एकीकृत अनुसंधान साक्ष्य की नीतिगत स्वीकृति” विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इसमें वैज्ञानिक शोध निष्कर्षों को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति और स्वास्थ्य सेवाओं में लागू करने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। आईसीएमआर ने कहा कि यह वार्षिक बैठक भारत के क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम में सहयोग बढ़ाने, नैतिक और नियामक ढांचे को मजबूत करने तथा वैज्ञानिक नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
