नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और स्ट्रेट होर्मुज ऑफ को खोलने के लिए लंबे समय से चर्चा जारी है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच दोनों देशों में एक समझौता होता दिख रहा है, जिससे ईरान के साथ चल रही लड़ाई खत्म हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच यह फिलहाल का सबसे बड़ा अपडेट है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए इस संभावित समझौते पर चर्चा तेज हो गई है। यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता, तेल आपूर्ति और परमाणु मुद्दों पर केंद्रित है।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि समझौता कब और कैसे अंतिम रूप लेगा और इसके अलग-अलग हिस्से कब से लागू होंगे। ट्रंप ने मध्य पूर्व में सहयोगियों के साथ हुई बातचीत के बाद ये बातें कहीं, जिसमें इजराइल के साथ हुई एक अलग बातचीत भी शामिल थी।
समझौते की मुख्य बातें
युद्ध का अंत और सीजफायर: समझौते के तहत ईरान-अमेरिका और इजराइल से जुड़े संघर्ष को खत्म करने का प्रावधान है। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने की बात शामिल है, यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा होकर गुजरता है।
परमाणु कार्यक्रम: वीदेश मीडिया के अनुसार ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को छोड़ने या कम करने के लिए तैयार है। वर्तमान में ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60% शुद्धता वाला यूरेनियम है, जो हथियार-ग्रेड (90%) के बहुत करीब है। इसका कुछ हिस्सा पतला किया जा सकता है और कुछ तीसरे देश को ट्रांसफर किया जा सकता है।
समयसीमा: समझौते की कुछ शर्तों पर 60 दिनों की अवधि में आगे बातचीत होगी। इस दौरान प्रतिबंधों में राहत (Sanctions Relief) और ईरान के फ्रोजन फंड्स को रिलीज करने पर चर्चा होगी।
मध्यस्थता: पाकिस्तान जैसे देश बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इस बातचीत को क्षेत्रीय खाड़ी देशों का भी समर्थन है।
ट्रंप ने खुद कहा है कि जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए लेकिन बातचीत बहुत अच्छी चल रही है।
अभी भी अनिश्चितताएं
समझौते के हर पहलू पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। खासकर परमाणु निरीक्षण और ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर क्या शर्तें होंगी, यह स्पष्ट नहीं है। ईरानी सरकार के सभी गुटों का पूरा समर्थन मिलना बाकी है। अमेरिकी घरेलू राजनीति में कुछ रिपब्लिकन सांसद, जो ईरान पर सख्त रुख रखते हैं, इस प्रस्ताव की आलोचना कर रहे हैं।
वैश्विक प्रभाव
दोनों देशों में समझौते की उम्मीद के चलते तेल की कीमतें घटी हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात है। होर्मुज खुलने से खाड़ी देशों, भारत समेत कई आयातक देशों को फायदा होगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगने से मध्य पूर्व में हथियारों की दौड़ रुक सकती है।
