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शिमला, संवाददाता : shimala News : हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच लाहौल घाटी में चोखंग नाले के उफान ने मूरिंग-नैनगार सड़क का करीब 200 मीटर हिस्सा बहा दिया है, जिससे प्रसिद्ध नीलकंठ झील की यात्रा पूरी तरह ठप हो गई है। कुल्लू में ब्यास नदी में राफ्टिंग पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। कई जिलों में सड़कें, पेयजल योजनाएं और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। राज्य में मानसून के शुरुआती चार दिनों में सामान्य से 86 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है।

हिमाचल प्रदेश में येलो अलर्ट के बीच लाहौल घाटी में उफनाए चोखंग नाले ने मूरिंग-नैनगार सड़क का करीब 200 मीटर हिस्सा बहा दिया, जिससे प्रसिद्ध नीलकंठ झील की यात्रा पर ब्रेक लग गया है। सड़क ध्वस्त होने के बाद श्रद्धालुओं, ट्रैकरों और पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। पालमपुर में न्यूगल खड्ड का जलस्तर बढ़ने से पंजाब के दो बच्चों समेत सात पर्यटक दूसरी ओर फंस गए। दमकल विभाग की टीम ने सभी को सुरक्षित रेस्क्यू किया। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और हमीरपुर में बारिश दर्ज की गई। राजधानी शिमला और धर्मशाला में दिनभर बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर झमाझम बारिश का दौर चलता रहा।

दूसरी ओर मैदानी जिलों में बढ़ी उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। रामपुर खंड के दुर्गम क्षेत्र 15/20 में गानवी खड्ड में वाहनों को पार करने के लिए आरसीसी पाइप से बनाया गया अस्थायी पुल बह गया। इससे पंचायत गानवीं, कूट, क्याव का संपर्क कट गया है। पर्यटन विभाग कुल्लू ने ब्यास में राफ्टिंग गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है। चंबा-तीसा मुख्य मार्ग पर रखालू मंदिर के समीप भूस्खलन ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर दिया।

पहाड़ी से गिरी विशाल चट्टानों ने सड़क को बंद कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं

पहाड़ी से गिरी विशाल चट्टानों ने सड़क को बंद कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोक निर्माण विभाग की टीम ने शाम साढ़े चार बजे मार्ग को बहाल किया। न्याग्रां-बजोल-गरोंदा सड़क भी करीब पांच घंटे तक बंद रही। बारिश के कारण जलशक्ति विभाग की तीसा और भटियात उपमंडलों की 12 पेयजल योजनाएं प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। चुराह उपमंडल की कल्हेल-बंजली-रैला सड़क पर थलान के कुठलु स्थान पर लोक निर्माण विभाग ने शुक्रवार को सड़क सुरक्षा के लिए डंगा तैयार किया था, लेकिन निर्माण के कुछ घंटों बाद ही देर रात यह ढांचा ध्वस्त हो गया।

चार दिन में सामान्य से 86 फीसदी अधिक बारिश: इस मानसून सीजन में 1 से 4 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 86 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि के लिए 20.5 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया, लेकिन वास्तव में 38.2 मिलीमीटर बारिश हुई। चंबा में सामान्य से 154, हमीरपुर में सा0045, कांगड़ा 73, किन्नाैर 3733, कुल्लू 267, मंडी 19, शिमला 112, सिरमाैर 87, सोलन 179 व ऊना में 61 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। लाहाैल-स्पीति जिले में सामान्य से 37 फीसदी और बिलासपुर में दो फीसदी कम बारिश हुई है।

आज भी शिमला, कांगड़ा और सिरमौर में येलो अलर्ट: मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश में 10 जुलाई तक मौसम खराब बना रहेगा। रविवार को शिमला, कांगड़ा और सिरमौर में बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। अन्य जिलों में बूंदांबादी के आसार हैं। 6 और 7 जुलाई को कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट है।