donalod trump

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : मेरिकी राजनीति में युद्ध की शक्तियां राष्ट्रपति और अमेरिकी संसद के बीच विभाजित हैं। ऐसे में संसद द्वारा युद्ध-विराम या शांति प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बावजूद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का ईरान के खिलाफ हमले का आदेश कैसे दे रहे हैं। आइये जानते हैं राष्ट्रपति और संसद की शक्तियां और संवैधानिक स्थिति।

राष्ट्रपति की शक्तियां

अमेरिका के संविधान का अनुच्छेद 2 राष्ट्रपति को अमेरिकी सेना का कमांडर-इन-चीफ बनाता है। यदि राष्ट्रपति को लगता है कि अमेरिकी सेना, दूतावासों या राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई आसन्न खतरा या हमला हुआ है, तो वह संसद की मंजूरी के बिना भी तुरंत जवाबी हमला या रक्षात्मक कार्रवाई का आदेश दे सकता है।

वार पावर्स रेजोल्यूशन, 1973

यह कानून राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया था, लेकिन यह राष्ट्रपति को एक विशेष छूट भी देता है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति संसद की अनुमति के बिना भी किसी भी विदेशी संघर्ष में 60 दिनों के लिए अमेरिकी सेना भेज सकता है।

हमला करने के बाद राष्ट्रपति को केवल 48 घंटे के भीतर संसद को इसकी सूचना देनी होती है। संसद केवल 60 दिन बीत जाने के बाद ही सेना वापस बुलाने के लिए दबाव बना सकती है।

अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की शक्तियां

संविधान के अनुच्छेद 1, अनुभाग 8 के तहत औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा करने का अधिकार केवल संसद के पास है। संसद के पास पावर ऑफ द पर्स है, यानी सेना और युद्ध के लिए बजट या फंड रोकना।

हालांकि संसद युद्ध-विराम प्रस्ताव पारित कर सकती है, लेकिन राष्ट्रपति अक्सर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर और अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर नजरअंदाज कर देते हैं।