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नई दिल्ली ,न्यूज़ डेस्क : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को देश के युवाओं से अपील की कि वे खुद को पूरी तरह से देशहित के लिए समर्पित करें और निजी स्वार्थ से ऊपर उठें। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे एक मज़बूत राष्ट्र बनाने के लिए भारत के सामने मौजूद मौके का पूरा फ़ायदा उठाएं। लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 मिलने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि युवा पीढ़ी को सिर्फ़ देशहित में काम करने का संकल्प लेना चाहिए और संकीर्ण व अल्पकालिक स्वार्थों को नज़रअंदाज़ करना चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डोभाल को तिलक स्मारक ट्रस्ट की ओर से शुरू किया गया यह पुरस्कार सौंपा। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को खुद को पूरी तरह समर्पित कर देना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि वे सिर्फ़ देशहित में काम करेंगे। उन्हें अपने छोटे-मोटे निजी हितों का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए और अगर ऐसी बातें मन में आएं भी, तो उन्हें नज़रअंदाज़ कर देना चाहिए। 

डोभाल ने कहा कि भारत अपने इतिहास के एक अहम दौर से गुज़र रहा है और उसे इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए

डोभाल ने कहा कि भारत अपने इतिहास के एक अहम दौर से गुज़र रहा है और उसे इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश के इतिहास में एक सुनहरा मौका आया है। हम इसे गंवा नहीं सकते। अभी हमारी प्राथमिकता देश का निर्माण करना है। भारत के भविष्य पर भरोसा जताते हुए NSA ने कहा कि देश अपने मिशन में सफल होगा और इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।

डोभाल ने आगे कहा कि मुझे भरोसा है कि हम इस कोशिश में सफल होंगे और एक नया इतिहास रचेंगे। उन्होंने कहा कि देश खुशकिस्मत है कि उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे नेता मिले हैं। लोकमान्य तिलक की तारीफ़ करते हुए डोभाल ने कहा कि वे न सिर्फ़ एक स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि एक समाज सुधारक और दार्शनिक भी थे। उन्होंने कहा कि जब पुणे में प्लेग फैला और तिलक के 21 साल के बेटे की जान चली गई, तो उस आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले नेता ने शहर नहीं छोड़ा, बल्कि वहीं डटे रहे।

उन्होंने आगे कहा कि शायद आज के युवाओं को लगता है कि भारत हमेशा से ऐसा ही था। युवाओं को शायद लगता है कि आज़ादी का मतलब है जो मन में आए वो करना। आज़ादी ऐसी नहीं थी। जिन लोगों ने आज़ादी के लिए अपनी जान दी, जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया… जैसे लोकमान्य तिलक। लोगों में दर्द था… वे अपनी बात कहना चाहते थे। तिलक ने उन्हें ऐसा करने की हिम्मत दी और उनमें एक नई ‘चेतना’ जगाई।