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 नई दिल्ली, ,डिजिटल डेस्क : केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग को लेकर चेताया है।

कहा कि इससे क्रानिक किडनी डिजीज (सीकेडी), किडनी खराब होने और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) का जोखिम तेजी से बढ़ा है। एएमआर तब होता है जब रोगाणुओं पर दवा का कोई असर नहीं होता।

21 सितंबर को जारी सर्कुलर में सीडीएससीओ ने नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआइडी) या दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक के सही, सुरक्षित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल के साथ-साथ प्रिस्क्रिप्शन से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल डा. राजीव सिंह रघुवंशी द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि दवाओं का आयात, निर्माण, बिक्री और वितरण ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट, 1940 और इसके तहत बने नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है।

संभावित जोखिम को देखते हुए एनएसएआइडी और एंटीबायोटिक समेत कई दवाओं को ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल जी, एच, एच1 और एक्स के तहत रखा गया है

संभावित जोखिम को देखते हुए एनएसएआइडी और एंटीबायोटिक समेत कई दवाओं को ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल जी, एच, एच1 और एक्स के तहत रखा गया है और इनके लिए उचित मेडिकल देखरेख की ज़रूरत होती है।

अधिकतर एनएसएआइडी दवाएं शेड्यूल एच में हैं। ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 97 के तहत इन्हें किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं बेचा जा सकता है। अधिकतर एंटीबायोटिक्स शेड्यूल एच1 में हैं। उन पर चेतावनी लिखी होती है कि डाक्टर की सलाह के बिना इन्हें लेना खतरनाक हो सकता है।

आम लोगों को सलाह
दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक का बिना चिकित्सकीय सलाह के मनमाने तरीके से इस्तेमाल न करें।
एंटीबायोटिक का इस्तेमाल खुद से इलाज करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
एंटीबायोटिक को डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीके से ही लें। बची हुई दवा का दोबारा इस्तेमाल ने करें।
जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है वे दर्द निवारक दवाएं लेने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।